नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं अशुतोष रांका और सौरव दास की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इसके बाद उन्हें तिहाड़ जेल भेजा गया। इस कार्रवाई के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर सरकार विरोध की आवाज को दबाना चाहती है, तो उसे खुलकर आपातकाल घोषित कर देना चाहिए।
जंतर-मंतर पर तिरंगा लेकर पहुंचे थे नेता
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पूरा मामला दिल्ली के जंतर-मंतर से जुड़ा है, जहां CJP नेताओं ने कथित तौर पर बैरिकेड पार कर उस क्षेत्र में प्रवेश किया, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं रखा गया था। इस दौरान नेताओं ने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लहराया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारे लगाए।
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में अशुतोष रांका, सौरव दास और उनके सहयोगी अजिंक्य शिंदे को हिरासत में लिया था। पुलिस की कार्रवाई के बाद तीनों को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। बुधवार को अशुतोष रांका और सौरव दास को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया। वहीं, अजिंक्य शिंदे के मामले में जमानत संबंधी औपचारिकताएं पूरी किए जाने की जानकारी सामने आई।
किन आरोपों के तहत हुई कार्रवाई?
रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित रूप से अनधिकृत प्रवेश, निषेधाज्ञा के उल्लंघन, शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तें तोड़ने और सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने जैसे आरोपों के तहत मामला दर्ज किया है।
बताया गया है कि रांका और दास ने इससे पहले हिरासत में लिए जाने के बाद एक वर्ष तक शांति बनाए रखने से संबंधित बॉन्ड पर हस्ताक्षर किए थे। पुलिस का आरोप है कि जंतर-मंतर पर दोबारा पहुंचने की कार्रवाई में बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन हुआ। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
अभिजीत दीपके ने क्यों कहा- ‘इमरजेंसी लगा दो’?
दोनों नेताओं को जेल भेजे जाने के बाद CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर नेताओं का अपराध केवल जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराना था, तो उनके खिलाफ इतनी सख्त कार्रवाई क्यों की गई?
दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि अगर सरकार असहमति की आवाज को दबाने के लिए इतनी दृढ़ है, तो उसे आधिकारिक रूप से आपातकाल घोषित करने का साहस दिखाना चाहिए। उनके बयान का आशय सरकार पर विरोध-प्रदर्शनों को दबाने का आरोप लगाना था। यह दीपके की राजनीतिक प्रतिक्रिया है, न कि किसी न्यायिक निष्कर्ष का बयान।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी है आंदोलन
CJP और अन्य संगठनों के विरोध-प्रदर्शनों की प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष और आंदोलन से जुड़े लोगों ने मतदाता सूची में बदलाव को लेकर चिंता जताई है, जबकि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े आरोपों पर संबंधित पक्षों के रुख को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
इस बीच, दिल्ली में जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद विरोध-प्रदर्शनों को लेकर विवाद और बढ़ गया है। प्रशासन की ओर से रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और शाहदरा स्थित CBD मैदान को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों के तौर पर बताया गया है।
रांका और सौरव दास को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने से CJP और प्रशासन के बीच टकराव का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। अब आगे की कानूनी कार्रवाई और आंदोलन के अगले कदम पर नजर रहेगी।






