लखनऊ: उत्तर प्रदेश में शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज़ होता दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को मेरठ और लखीमपुर खीरी में छात्रों और अधिवक्ताओं ने अलग-अलग तरीकों से अपनी नाराज़गी जताई। दोनों जगह प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन विरोध का तरीका चर्चा का विषय बन गया।
मेरठ में प्रदर्शनकारियों ने एक प्रतीकात्मक अर्थी यात्रा निकाली। इस दौरान उन्होंने नारेबाजी करते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी कार्रवाई की मांग की। अधिवक्ताओं ने भी इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया और कहा कि छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
दूसरी ओर, लखीमपुर खीरी में छात्रों ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को गुलाब के फूल भेंट किए और एक ज्ञापन सौंपते हुए अपनी मांगों से अवगत कराया। छात्रों का कहना था कि उनका उद्देश्य शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाना है।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, समयबद्ध कार्रवाई और युवाओं के हितों की रक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए। उनका कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों में निष्पक्ष व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि अभ्यर्थियों का भरोसा बना रहे।
दोनों जिलों में प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर ज्ञापन प्राप्त किया और उनकी मांगों को संबंधित स्तर तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
राज्य के अलग-अलग हिस्सों में छात्रों की सक्रियता यह संकेत दे रही है कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दे युवाओं के लिए प्रमुख चिंता का विषय बने हुए हैं। आने वाले दिनों में इस विषय पर आगे की गतिविधियों पर सभी की नजर रहेगी।






