योगी सरकार का “मीठा” एलान या चुनावी शुगर कोटिंग? — गन्ना मूल्य बढ़ोतरी पर उठे सवाल लखनऊ | विशेष रिपोर्ट उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने गन्ना किसानों के लिए ₹30 प्रति कुन्तल की ऐतिहासिक वृद्धि का दावा किया है, लेकिन विपक्ष और कृषि विशेषज्ञों ने इसे चुनावी मौसम की तैयारी बताया है। सवाल उठ रहा है कि क्या यह बढ़ोतरी वाकई किसानों की लागत और तकलीफों की भरपाई कर पाएगी? ₹30 की बढ़ोतरी — “इतिहास” या “मायाजाल”? सरकार ने पेराई सत्र 2025-26 के लिए अगेती प्रजाति का गन्ना मूल्य ₹400 और सामान्य प्रजाति का ₹390 प्रति कुन्तल तय किया है। बढ़ोतरी को “ऐतिहासिक” बताया जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि डीजल, खाद, मजदूरी और बिजली के दाम पिछले तीन वर्षों में कहीं ज़्यादा बढ़े हैं। ऐसे में ₹30 की वृद्धि नाम मात्र की राहत है।किसानों का कहना है कि जब तक भुगतान समय पर नहीं होगा, तब तक कोई भी वृद्धि “कागज़ी मिठास” से ज़्यादा नहीं। सरकार का दावा है कि 2017 से अब तक ₹2,90,225 करोड़ का भुगतान किया गया — लेकिन कई जिलों में आज भी पुराने बकाए लंबित हैं। कई मिलें भुगतान में देरी कर रही हैं, जबकि किसान बैंक की किश्तें और खेती का खर्च नहीं चुका पा रहे।पूर्ववर्ती सरकारों की तुलना में योगी सरकार के आंकड़े भले बड़े दिखते हों, लेकिन किसानों का कहना है कि “असली राहत आंकड़ों से नहीं, जेब से महसूस होती है।” चीनी मिलों में निवेश, किसानों को लाभ कितना? सरकार ने 8 साल में ₹12,000 करोड़ के निवेश और 4 नई मिलों के खुलने का दावा किया है, लेकिन किसानों का कहना है कि मिल मालिकों को फायदा ज़्यादा हुआ, किसानों को नहीं। चीनी की कीमतें बढ़ीं, एथेनॉल उत्पादन कई गुना हुआ, पर गन्ना मूल्य का अनुपातिक लाभ किसानों तक नहीं डिजिटल सिस्टम से पारदर्शिता या परेशानी?“स्मार्ट गन्ना किसान” सिस्टम को केंद्र सरकार ने भले “मॉडल सिस्टम” कहा हो, लेकिन कई किसानों को ऑनलाइन पर्ची में तकनीकी खामियों की शिकायत है।गांवों में नेटवर्क की समस्या और डिजिटल साक्षरता की कमी के कारण कई बुजुर्ग किसान पर्ची तक नहीं निकाल पा रहे।राज्य में एथेनॉल उत्पादन 41 करोड़ लीटर से बढ़कर 182 करोड़ लीटर पहुंच गया है, पर किसानों को इस बढ़े हुए उत्पादन का सीधा लाभ नहीं मिला।किसान यूनियन का आरोप है कि सरकार मिल मालिकों को “एथेनॉल बोनस” देती है, पर किसानों को उनके गन्ने का उचित मूल्य तक नहीं मिलता।— विपक्ष का हमला सपा और कांग्रेस ने इसे “चुनावी मिठाई” बताया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार ने गन्ना मूल्य में वृद्धि चुनावी साल को देखते हुए की है, ताकि किसान वर्ग को लुभाया जा सके। योगी सरकार का यह फैसला किसानों को तत्काल राहत जरूर देगा, लेकिन ज़मीनी स्तर पर भुगतान, लागत, और लाभ के अंतर को देखकर कहा जा सकता है कि यह बढ़ोतरी राजनीतिक रूप से मीठी, पर आर्थिक रूप से फीकी है।






