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बरेली बवाल को एक साल: तौकीर रजा जेल में, 55 आरोपी अब भी फरार

राहत दिलाने के नाम पर ‘दलालों’ ने वसूली मोटी रकम,पुलिस करवाई के आगे धरा रह गया पैसा और पहुँच।

बरेली। 26 सितंबर 2025 को बरेली में हुए बवाल को एक साल पूरा हो गया है। एक साल बाद भी इस प्रकरण की कानूनी और पुलिस कार्रवाई जारी है। आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां करीब एक साल से जेल में हैं, जबकि बवाल से जुड़े करीब 55 आरोपी अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर बताए जा रहे हैं। फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने एक बार फिर कार्रवाई तेज करने की तैयारी की है। एसएसपी अनुराग आर्य ने संबंधित थानों और एसओजी टीमों को आरोपियों की तलाश कर गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं।

26 सितंबर को सड़कों पर उतरी थी भीड़, कई इलाकों में हुआ था बवाल

पुलिस के मुताबिक, 26 सितंबर 2025 को कानपुर से जुड़े एक प्रकरण को लेकर इस्लामिया ग्राउंड में प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। प्रशासन से अनुमति नहीं मिलने के बावजूद शहर के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। पुलिस का आरोप है कि भीड़ को रोकने के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया और कई स्थानों पर हिंसक घटनाएं हुईं।

बवाल के बाद पुलिस ने व्यापक कार्रवाई शुरू की। कोतवाली में सात, बारादरी में दो तथा प्रेमनगर, कैंट और किला थाने में एक-एक मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी गई।

114 आरोपी भेजे गए जेल, 72 को मिली जमानत

उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, बवाल से जुड़े मामलों में मौलाना तौकीर रजा, नफीस, नदीम और अनीस सकलैनी समेत कुल 114 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इनमें से 72 आरोपियों को जमानत मिलने की बात कही गई है, जबकि रिपोर्ट में 24 आरोपियों के अभी जेल में होने का उल्लेख है। पुलिस की ओर से दर्ज मुकदमों में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है।

फतेहगढ़ जेल में तौकीर रजा, अदालतों से नहीं मिली राहत

आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां को फतेहगढ़ जेल में रखा गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उनकी जमानत को लेकर अदालतों में कानूनी प्रयास किए गए, लेकिन हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से अपेक्षित राहत नहीं मिली। दूसरी ओर बवाल से संबंधित मुकदमों की न्यायिक प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है।

‘राहत’ के नाम पर दलाली के आरोप, रकम गई लेकिन कार्रवाई नहीं रुकी

बवाल के बाद पुलिस और प्रशासन की सख्त कार्रवाई के बीच एक और गंभीर आरोप चर्चा में रहा। कार्रवाई की जद में आए लोगों को मुकदमों और पुलिस कार्रवाई से राहत दिलाने तथा अधिकारियों तक अपनी मजबूत पहुंच होने का दावा कर कथित बिचौलियों द्वारा मोटी रकम वसूलने के आरोप सामने आए।

आरोप है कि कुछ लोगों से पुलिस कार्रवाई में राहत दिलाने का भरोसा देकर रकम ली गई, लेकिन कथित रसूख और पहुंच के दावों के बावजूद वे पुलिस की कार्रवाई रुकवाने या संबंधित लोगों को राहत दिलाने में कामयाब नहीं हुए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही इस संबंध में किसी कथित बिचौलिए की भूमिका आधिकारिक रूप से स्थापित होने की जानकारी सामने आई है।

145 करोड़ की संपत्तियों पर कार्रवाई का दावा

बवाल के बाद प्रशासन की कार्रवाई केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रही। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, आरोपियों और उनके करीबियों से संबंधित बताई गई करीब 145 करोड़ रुपये की संपत्तियों को सीज करने अथवा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।

रिपोर्ट में 450 दुकानें, एक होटल, पांच मैरिज हॉल, एक स्कूटी एजेंसी, एक सर्विस सेंटर, दो जिम, एक कारखाना, एक बर्फ फैक्ट्री और एक मकान सीज किए जाने का उल्लेख है। इसके अलावा एक ई-रिक्शा चार्जिंग स्टेशन और चार बारातघर ध्वस्त कराने तथा सैलानी रोड पर करीब 400 दुकानों से कथित अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई का भी जिक्र है।

एक साल बाद अब 55 फरार आरोपियों पर पुलिस की नजर

बवाल की पहली बरसी के साथ पुलिस का फोकस अब उन आरोपियों पर है, जो अब तक गिरफ्तारी से बाहर हैं। करीब 55 फरार आरोपियों की तलाश के लिए संबंधित थानों के साथ एसओजी को भी लगाया गया है। कुछ आरोपियों को अदालत से गिरफ्तारी के खिलाफ अंतरिम राहत मिलने और कुछ की ओर से कानूनी राहत के लिए आवेदन किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

एक साल बाद भी बरेली बवाल का अध्याय बंद नहीं हुआ है। एक तरफ अदालतों में मुकदमों की प्रक्रिया चल रही है, तो दूसरी तरफ पुलिस के सामने फरार आरोपियों को गिरफ्तार करने की चुनौती बनी हुई है।

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