आज पूरा देश श्रीकृष्ण के 5252वें जन्मोत्सव की भक्ति में डूबा रहा। जन्माष्टमी पर हर गली, हर मंदिर में कृष्ण जन्म के जयकारे गूंजते रहे। खासकर मथुरा, जहां कान्हा ने जन्म लिया था, वहां तो नज़ारा ही कुछ और था — श्रद्धा, आस्था और उल्लास का अद्भुत संगम।
पौराणिक परंपरा, आज भी उतनी ही जीवंत:
हर साल की तरह इस बार भी एक खास परंपरा निभाई गई — लड्डू गोपाल को खीरे में स्थापित कर गर्भस्थ रूप में पूजा करना। मान्यता है कि खीरा माँ देवकी के गर्भ का प्रतीक होता है और उसी में बालगोपाल को विराजमान कर, उनका जन्म स्मरण किया जाता है। यह परंपरा भगवान से भक्त के उस आत्मिक रिश्ते को जीवंत कर देती है, जिसे शब्दों में बांधना मुश्किल है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी टेका माथा:
इस खास मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मथुरा पहुँचे। सुबह 11:30 बजे उनके आगमन के साथ ही पूरा शहर और भी सज गया। दोपहर 12 बजे उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर पूजा-अर्चना की और बाद में पांचजन्य प्रेक्षागृह में साधु-संतों का सम्मान किया। इस दौरान कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया गया।
शोभायात्रा बनी आकर्षण का केंद्र:
एक दिन पहले शुक्रवार को सुबह 10 बजे श्रीकृष्ण जन्मस्थान से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। रास्तों में भक्तों की भीड़, कलाकारों के नृत्य, ढोल-नगाड़ों और बीन की मधुर धुन ने ऐसा माहौल बना दिया कि हर कोई भावविभोर हो गया। ये सिर्फ एक यात्रा नहीं थी, यह श्रद्धा की चलती-फिरती मिसाल थी।
हर ओर दिखा कान्हा का जादू:
शनिवार को मथुरा की गलियों में वही रौनक रही। लाखों श्रद्धालु दूर-दूर से आए और श्रीकृष्ण जन्म का जश्न मनाया। मंदिरों की सजावट, झांकियां, भजन-कीर्तन और भक्तों की उमंग — सबकुछ मिलकर जैसे समय को पीछे ले गया, उस पल में जहां देवकी-वासुदेव के आँगन में कान्हा का जन्म हुआ था।






