अशोक कुमार श्रीवास की रिपोर्ट
भैसमा में जुटे कोरबा जिले की 60 सहकारी समितियों के प्रबंधक, ऑपरेटर एवं कर्मचारी, 10 प्रमुख बिंदुओं पर हुई चर्चा
भैसमा//कोरबा जिला सहकारी समिति कर्मचारी संघ के तत्वावधान में जिले के सहकारी समिति कर्मचारियों की एकदिवसीय जिला स्तरीय बैठक रविवार, 25 अक्टूबर को समिति कार्यालय प्रांगण भैसमा में संपन्न हुई। बैठक में कोरबा जिले की सभी 60 सहकारी समितियों के प्रबंधक, ऑपरेटर एवं कर्मचारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी धान खरीदी सीजन के दौरान सहकारी समिति के कर्मचारियों को होने वाली विभिन्न समस्याओं, कार्य के दौरान पड़ने वाले अनावश्यक दबाव तथा अन्य व्यावहारिक कठिनाइयों की ओर शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराना रहा।
बैठक में जिलेभर से पहुंचे कर्मचारियों ने धान खरीदी के दौरान अपने-अपने स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं को विस्तार से साझा किया। कर्मचारियों ने खुलकर अपनी बात रखते हुए धान खरीदी कार्य के दौरान उत्पन्न होने वाली परेशानियों, कार्य की जिम्मेदारियों और कर्मचारियों पर पड़ने वाले दबाव के संबंध में चर्चा की। इस दौरान कर्मचारियों ने एकजुट होकर अपनी समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
धान खरीदी की समस्याओं पर हुई गंभीर चर्चा
आगामी धान खरीदी सीजन को ध्यान में रखते हुए बैठक में कुल 10 प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा की गई। इन बिंदुओं के माध्यम से सहकारी समिति के कर्मचारियों की समस्याओं को व्यवस्थित रूप से शासन के समक्ष रखने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि कर्मचारियों से संबंधित समस्याओं एवं सुझावों को संकलित कर जिला प्रशासन के माध्यम से शासन तक पहुंचाया जाएगा, ताकि संबंधित विषयों पर आवश्यक पहल की जा सके।
बैठक में उपस्थित कर्मचारियों ने कहा कि धान खरीदी का कार्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। इस महत्वपूर्ण कार्य को सुचारु रूप से संपन्न कराने में सहकारी समिति के कर्मचारियों की अहम भूमिका रहती है। ऐसे में धान खरीदी के दौरान कर्मचारियों को आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों पर भी गंभीरता से विचार किया जाना आवश्यक है।
कर्मचारियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि धान खरीदी के समय विभिन्न प्रकार की जिम्मेदारियों का निर्वहन करना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में कार्य से संबंधित समस्याओं का समय पर निराकरण और कर्मचारियों को आवश्यक सहयोग मिलना जरूरी है। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि कर्मचारियों की समस्याओं को नजरअंदाज करने के बजाय उनके समाधान के लिए उचित पहल की जानी चाहिए।
शासन-प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने की तैयारी
बैठक में चर्चा किए गए 10 बिंदुओं को आगामी दिनों में जिला प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत कर शासन तक पहुंचाने की बात कही गई। संघ का उद्देश्य कर्मचारियों की समस्याओं को एकजुट होकर संबंधित अधिकारियों के सामने रखना और धान खरीदी कार्य को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने के लिए आवश्यक समाधान की मांग करना है।
बैठक में कर्मचारियों ने अपनी समस्याओं को साझा करते हुए संगठन की एकजुटता को महत्वपूर्ण बताया। जिला स्तरीय बैठक में जिले की सभी 60 सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों की सहभागिता को कर्मचारियों की सामूहिक भागीदारी के रूप में देखा गया। कर्मचारियों ने अपने अनुभवों के आधार पर विभिन्न विषयों पर विचार रखे, जिससे समस्याओं को एक साझा मंच पर लाने का अवसर मिला।
संघ पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी रहे उपस्थित
इस जिला स्तरीय बैठक में कोरबा जिला सहकारी समिति कर्मचारी संघ के अध्यक्ष विनोद भट्ट, संरक्षक चंद्रेश कश्यप, वेद प्रकाश वैष्णव, ऋषि पांडेय, सचिव तुलेश्वर कौशिक सहित संघ के पदाधिकारी कमल दुबे, राजकुमार साहू, चंद्रशेखर केवत, आनंद कौशिक, दुलीचंद धीवर, प्यारे लाल साहू, नरेंद्र कश्यप, अरुण कश्यप, राधेश्याम कश्यप एवं अशोक दुबे प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
इसके अलावा ऑपरेटर संघ की ओर से श्रीमती राजकुमारी साहू एवं तोमल साहू सहित जिले की विभिन्न सहकारी समितियों के प्रबंधक, ऑपरेटर और कर्मचारी बैठक में शामिल हुए।
कर्मचारियों के हितों को लेकर एकजुटता पर जोर
बैठक के माध्यम से सहकारी समिति कर्मचारियों ने आगामी धान खरीदी सीजन से पहले अपनी समस्याओं को सामने लाने और उनके निराकरण के लिए संगठित प्रयास करने की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में हुई चर्चा के आधार पर तैयार किए जाने वाले 10 सूत्रीय मांग एवं समस्या संबंधी बिंदुओं को जिला प्रशासन के माध्यम से शासन तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
जिला स्तरीय इस बैठक को सहकारी समिति कर्मचारियों की समस्याओं को साझा मंच प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब कर्मचारियों की नजर इस बात पर रहेगी कि बैठक में उठाए गए मुद्दों को शासन-प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के बाद उनके समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।










