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बरेली: जनसेवा केंद्र की आड़ में साइबर फ्रॉड का आरोप, महिला के खाते से निकले 43,725 रुपये वापस, ऑनलाइन लेनदेन पर गंभीर सवाल

जनसेवा केंद्र संचालक उमेश वर्मा और उसकी पत्नी पूजा मिश्रा पर अनधिकृत यूपीआई ट्रांजेक्शन के जरिए रकम निकालने का आरोप, बैंक स्टेटमेंट में पूरी धनराशि वापस आने का दावा, साइबर फ्रॉड की आशंका को लेकर उठे कई सवाल

बरेली। जिले के इज्जतनगर क्षेत्र में जनसेवा केंद्र की आड़ में कथित साइबर फ्रॉड का मामला सामने आया है। ग्राम गुड़िया अहमद नगर निवासी एक महिला ने जनसेवा केंद्र संचालक उमेश वर्मा और उसकी पत्नी पूजा मिश्रा पर बैंक खाते से बिना अनुमति ऑनलाइन भुगतान कर 43,725.46 रुपये निकालने का गंभीर आरोप लगाया है। महिला का दावा है कि सितंबर 2026 में उनके खाते से अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संदिग्ध लेनदेन किए गए। हालांकि, बाद में बैंक स्टेटमेंट निकलवाने पर पूरी धनराशि वापस आने की जानकारी मिली। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर बिना अनुमति बताए जा रहे लेनदेन किसने किए और रकम वापस किस माध्यम से पहुंची?

जनसेवा केंद्र की आड़ में साइबर धोखाधड़ी का आरोप

महिला के अनुसार, 2, 7 और 8 सितंबर 2026 को उनके बैंक खाते से कई ऑनलाइन ट्रांजेक्शन हुए। इन लेनदेन के माध्यम से कुल 43,725.46 रुपये निकाले जाने का आरोप है।

महिला का दावा है कि उन्हें इन भुगतानों की जानकारी नहीं थी और उन्होंने किसी को भी अपने खाते से धनराशि स्थानांतरित करने की अनुमति नहीं दी थी।

महिला ने आरोप लगाया कि जनसेवा केंद्र संचालक उमेश वर्मा और उसकी पत्नी पूजा मिश्रा की इन संदिग्ध लेनदेन में भूमिका रही है। हालांकि, दोनों की कथित संलिप्तता की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

यूपीआई के जरिए रकम निकलने का दावा

महिला का कहना है कि उनके खाते से अलग-अलग ऑनलाइन माध्यमों से धनराशि भेजी गई। इन भुगतानों को लेकर उन्होंने सवाल उठाए हैं कि आखिर उनके बैंक खाते का इस्तेमाल किसने और कैसे किया।

डिजिटल बैंकिंग में यूपीआई भुगतान के लिए निर्धारित प्रमाणीकरण प्रक्रिया होती है। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित लेनदेन किस मोबाइल डिवाइस, यूपीआई आईडी और बैंकिंग माध्यम से किए गए थे।

महिला ने सभी ट्रांजेक्शन का विस्तृत रिकॉर्ड सामने लाने की मांग की है, ताकि यह पता चल सके कि रकम किन खातों में पहुंची थी।

बैंक स्टेटमेंट में वापस मिली पूरी रकम

इस कथित साइबर फ्रॉड मामले में नया मोड़ तब आया, जब महिला ने बैंक स्टेटमेंट निकलवाया। महिला के अनुसार, स्टेटमेंट में पहले निकाली गई पूरी धनराशि वापस आने की जानकारी मिली।

महिला का दावा है कि 43,725.46 रुपये खाते में लौट आए हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि रकम बैंकिंग रिवर्सल, रिफंड या किसी व्यक्ति द्वारा किए गए भुगतान के माध्यम से वापस आई।

महिला ने सवाल उठाया कि यदि पहले हुए लेनदेन अधिकृत थे, तो पूरी रकम वापस आने की वजह क्या थी?

रकम वापस आने से नहीं सुलझा साइबर फ्रॉड का सवाल

महिला का कहना है कि पैसे वापस मिल जाने से संदिग्ध डिजिटल लेनदेन का मामला समाप्त नहीं हो जाता। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि खाते से रकम निकालने की प्रक्रिया किसने शुरू की थी।

क्या भुगतान किसी अन्य व्यक्ति ने किया था? क्या महिला के बैंक खाते से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल हुआ था? और क्या रकम लौटाने वाला व्यक्ति वही था, जिसे पहले भुगतान मिला था?

इन सवालों के जवाब बैंकिंग रिकॉर्ड, यूपीआई ट्रांजेक्शन आईडी और भुगतान के स्रोत की जानकारी से मिल सकते हैं।

हालांकि, रकम वापस आने मात्र से साइबर धोखाधड़ी या किसी व्यक्ति की संलिप्तता साबित नहीं होती।

डिजिटल बैंकिंग की सुरक्षा पर गंभीर सवाल

जनसेवा केंद्रों के माध्यम से बड़ी संख्या में नागरिक ऑनलाइन और बैंकिंग सेवाओं का उपयोग करते हैं। ऐसे केंद्रों पर वित्तीय लेनदेन की सुरक्षा और ग्राहकों की बैंकिंग जानकारी की गोपनीयता बेहद महत्वपूर्ण है।

महिला द्वारा लगाए गए आरोप डिजिटल भुगतान की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को सामने लाते हैं। यदि किसी ग्राहक की अनुमति के बिना भुगतान किया जाता है, तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता का विषय हो सकता है।

हालांकि, इस मामले में कथित अनधिकृत भुगतान की वास्तविक परिस्थितियां अभी स्पष्ट नहीं हैं।

दूसरे पक्ष से संपर्क किया, लेकिन नहीं मिला जवाब

मामले में जनसेवा केंद्र संचालक उमेश वर्मा और उसकी पत्नी पूजा मिश्रा का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।

इस कारण आरोपों पर उनका स्पष्टीकरण सामने नहीं आ सका है।

साइबर फ्रॉड की आशंका, कई सवालों का जवाब बाकी

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि महिला के बैंक खाते से 43,725.46 रुपये किन परिस्थितियों में निकले और पूरी रकम वापस किसने भेजी।

महिला ने ऑनलाइन भुगतान प्राप्त करने वाले खातों, रकम वापसी के स्रोत और सभी डिजिटल ट्रांजेक्शन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

फिलहाल, महिला के अनुसार पूरी धनराशि वापस मिल चुकी है, लेकिन कथित साइबर फ्रॉड की सच्चाई, लेनदेन की प्रक्रिया और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

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