खीर गंगा में आई भीषण आपदा को एक महीना बीत चुका है, लेकिन धराली और हर्षिल के हालात अब भी जस के तस हैं। चारों ओर फैला मलबा आज भी उस भयावह दिन की याद दिलाता है, जब देखते ही देखते धराली बाजार और आधा गांव मिट्टी में समा गया था। इस आपदा में कई घर और बहुमंजिला इमारतें जमींदोज हो गईं, दर्जनों लोगों की जान गई और सेना के जवान भी लापता हो गए। प्रशासन ने बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं तो बहाल कर दी हैं, मगर गांव की रफ्तार और लोगों की जिंदगी अब भी ठहर सी गई है।
गांव में पसरा सन्नाटा, मदद की आस में लोग
धराली के लोग अब भी टूटे सपनों और मलबे के बीच जिंदगी गुजार रहे हैं। सुबह का नाश्ता करने के बाद हर कोई अपने उजड़े घरों और बिखरे सामान को देखकर भावुक हो जाता है। मंदिर प्रांगण में सामूहिक भोजन जारी है और जिनके घर तबाह हो गए हैं, वे पड़ोसियों के बचे हुए मकानों में शरण ले रहे हैं। स्थानीय निवासी बताते हैं कि गांव में सन्नाटा गहरा चुका है, होटल और कारोबार खत्म हो गए हैं और सरकार द्वारा घोषित विशेष पैकेज अब तक कागजों से बाहर नहीं आया। लोग अब भी इंतजार में हैं कि शायद कोई मदद उनके दरवाजे तक पहुंचे।






