भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्यशैली पर गंभीर चिंता जताते हुए उसे स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है: “आप कोई गैंगस्टर नहीं हैं, आपको कानून के चार दायरों के भीतर रहकर काम करना होगा।” अदालत की यह टिप्पणी उस समय आई जब एक PMLA (धनशोधन निवारण अधिनियम) मामले में ED की भूमिका और प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए।
क्या कहा कोर्ट ने?
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की:
“ED का दायित्व है कि वह कानून के भीतर काम करे। आप किसी अपराधी की तरह काम नहीं कर सकते। अगर आप भ्रष्टाचार से लड़ रहे हैं, तो खुद की प्रक्रिया भी निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए।”
प्रमुख मुद्दे जिन पर कोर्ट ने नाराज़गी जताई:
संवैधानिक मर्यादा का उल्लंघन: कोर्ट ने कहा कि एजेंसी को संविधान की मर्यादा का पालन करना चाहिए, न कि “हथकंडे” अपनाकर लोगों को डराना चाहिए।
दोषसिद्धि दर बेहद कम: पिछले पांच वर्षों में ED ने 5000 से अधिक मामलों की जांच की, परंतु दोषसिद्धि दर 1% से भी कम है।
राजनीतिक दुरुपयोग की आशंका: अदालत ने अप्रत्यक्ष रूप से संकेत दिया कि जांच एजेंसी का उपयोग विपक्षी नेताओं और असहमति की आवाज़ों को दबाने के लिए किया जा रहा है।
‘ED का काम अपराध से लड़ना है, खुद अपराधी की तरह बनना नहीं’
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि एजेंसी अपने अधिकारों का दुरुपयोग करती है, तो इससे न केवल उसका भरोसा टूटता है, बल्कि लोकतंत्र की नींव भी कमजोर होती है।






