उत्तरकाशी के धराली और हर्षिल में आसमान से आई आफत के बाद ज़मीन पर ज़िंदगी पटरी पर लाने की जंग जारी है। बादल फटने के बाद आई बाढ़ ने सबकुछ तहस-नहस कर दिया है। लेकिन उसी मलबे में अब भी उम्मीदें जिंदा हैं सेना, NDRF, SDRF और तमाम एजेंसियां हर हाल में लोगों को बचाने में जुटी हैं। कई गांवों में लोग फंसे हुए हैं, जिन्हें निकालने के लिए हेलीकॉप्टर लगातार उड़ान भर रहे हैं। इन लोगों को मातली हेलीपैड लाकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है।
सीएम धामी खुद मैदान में, राहत के काम पर पैनी नजर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हालात पर खुद नजर रखे हुए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि “सरकार किसी को भी अकेला नहीं छोड़ेगी”। अफसरों को निर्देश दिए गए हैं कि टूटी सड़कें, बिजली और मोबाइल नेटवर्क जैसे ज़रूरी संसाधन जल्द से जल्द बहाल किए जाएं।
वायुसेना बनी संकट की साथी
जहां सड़कें जवाब दे गई हैं, वहां वायुसेना ने मोर्चा संभाल लिया है। शिनूक और Mi-17V5 हेलीकॉप्टरों के साथ-साथ C-295 और AN-32 जैसे बड़े एयरक्राफ्ट दिन-रात राहत सामग्री और रेस्क्यू टीमों को पहुंचा रहे हैं करीब 20 टन से ज्यादा राहत सामग्री अब तक भेजी जा चुकी है। 130 से ज्यादा जवान ज़मीन पर राहत कार्य में जुटे हैं।
अब भी लापता हैं कई जिंदगियां
हालात अभी भी पूरी तरह काबू में नहीं हैं। एक जूनियर कमीशंड ऑफिसर समेत 9 सैन्यकर्मी अभी भी लापता हैं। ज़िंदा लोगों की तलाश के लिए खोजी कुत्तों, डॉक्टरों और रेस्क्यू कर्मियों की टीमें हर पत्थर-पत्थर छान रही हैं।
बारिश बनी चुनौती, लेकिन हौसला नहीं टूटा
भारी बारिश और टूटी हुई सड़कें हर कदम पर चुनौती बन रही हैं। भूस्खलन का मलबा कई रास्तों को बंद कर चुका है। इसके बावजूद राहत दल मैदान में डटे हुए हैं। जरूरी उपकरणों को हेलीकॉप्टर के ज़रिए प्रभावित इलाकों तक पहुंचाया जा रहा है। सेना और सभी एजेंसियां मिलकर धराली और हर्षिल में HADR (Humanitarian Assistance and Disaster Relief) मिशन को तेज़ी से आगे बढ़ा रही हैं। कई इलाकों का संपर्क अभी भी टूटा हुआ है, लेकिन इंसानी जज़्बा लगातार रास्ते बना रहा है।






