लखनऊ: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के छात्रावासों में नॉन-वेज भोजन पर रोक को लेकर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने इस निर्णय की आलोचना करते हुए इसे अनुचित बताया। उनका कहना है कि इस तरह के फैसलों में एक समान नीति अपनाई जानी चाहिए और इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए।
वहीं, लखनऊ ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने प्रशासन से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी मांसाहारी भोजन करती है और पोषण के लिहाज से भी इसे संतुलित आहार का हिस्सा माना जाता है।
दूसरी ओर, शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास ने इस मुद्दे को विश्वविद्यालय का आंतरिक निर्णय बताते हुए कहा कि इसे राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी छात्र को नॉन-वेज भोजन करना है, तो वह परिसर के बाहर जाकर इसका सेवन कर सकता है।
भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने KGMU के हॉस्टलों में नॉनवेज पर रोक के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि छात्रों को किस प्रकार का भोजन उपलब्ध कराया जाएगा, इसका निर्णय विश्वविद्यालय प्रशासन अपने स्तर पर करता है। यदि अधिकांश छात्र किसी विशेष प्रकार का भोजन चाहते हैं, तो उसी के अनुरूप व्यवस्था की जा सकती है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि छात्रों को पर्याप्त पोषण देने के लिए नॉनवेज के स्थान पर प्रोटीन से भरपूर शाकाहारी भोजन उपलब्ध कराया जाए।
इससे पहले KGMU के चीफ प्रोवोस्ट प्रो. कमल कुमार सावलानी ने हॉस्टलों की मेस और कैंटीन में मांसाहारी भोजन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश जारी किया था। आदेश के अनुसार, अब हॉस्टल मेस और कैंटीन में न तो नॉनवेज पकाया जाएगा और न ही परोसा जाएगा। छात्रों की पोषण संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भोजन में प्रोटीन युक्त शाकाहारी विकल्प शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
KGMU में कुल 18 हॉस्टल हैं। इससे पहले छात्रावासों की मेस में सप्ताह में तीन दिन नॉनवेज भोजन परोसा जाता था। विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 1905 में किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज के रूप में हुई थी, जबकि वर्ष 2002 में इसे विश्वविद्यालय का दर्जा मिला।






