अशोक कुमार श्रीवास की रिपोर्ट
तीन साल से शोपीस बनी पानी टंकी, ग्रामीणों तक नहीं पहुंचा नल का जल
करतला/कोरबा/केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना है। इसके लिए करोड़ों रुपये की लागत से पानी टंकियों, पाइपलाइन और घरेलू नल कनेक्शन का निर्माण कराया जा रहा है। लेकिन जिला कोरबा के विकासखंड करतला अंतर्गत ग्राम पंचायत सुपातराई में इस योजना की जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है।
ग्रामीणों के अनुसार गांव में जल जीवन मिशन के तहत करीब चार वर्ष पहले पानी टंकी का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया था। निर्माण के बाद उम्मीद थी कि जल्द ही प्रत्येक घर तक नल के माध्यम से पेयजल उपलब्ध होगा, लेकिन आज तक टंकी से एक बूंद पानी भी ग्रामीणों को नसीब नहीं हुई। करोड़ों रुपये की लागत से बनी यह पानी टंकी अब केवल एक शोपीस बनकर रह गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि आज भी उन्हें पेयजल के लिए पुराने हैंडपंप, कुओं और अन्य पारंपरिक स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। गर्मी के दिनों में पानी की समस्या और गंभीर हो जाती है, जिससे महिलाओं और बच्चों को दूर-दूर तक पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। ऐसे में जल जीवन मिशन का उद्देश्य गांव में पूरी तरह अधूरा दिखाई दे रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद न तो संबंधित विभाग के अधिकारियों ने व्यवस्था का निरीक्षण किया और न ही ठेकेदार ने योजना को चालू कराने की पहल की। उनका कहना है कि वर्षों से बंद पड़ी पानी टंकी प्रशासनिक उदासीनता और लापरवाही की कहानी बयां कर रही है। इससे यह भी आशंका जताई जा रही है कि निर्माण कार्य में अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुआ है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार द्वारा गांव-गांव तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए भारी राशि खर्च की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी के अभाव में कई स्थानों पर योजनाएं अधूरी या निष्प्रभावी साबित हो रही हैं। सुपातराई इसका ताजा उदाहरण है, जहां चार वर्षों से बनी पानी टंकी केवल देखने की वस्तु बनकर रह गई है।
ग्रामीणों ने शासन और जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, निर्माण कार्य और खर्च की तकनीकी जांच हो तथा दोषी ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही जल जीवन मिशन की योजना को शीघ्र शुरू कर प्रत्येक घर तक नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि ग्रामीणों को योजना का वास्तविक लाभ मिल सके।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे प्रशासन के समक्ष सामूहिक रूप से अपनी आवाज उठाने और आंदोलन करने के लिए भी बाध्य होंगे। उनका स्पष्ट कहना है कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ कागजों में नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देना चाहिए।







