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CISF विवाद: खरगे का सवाल – क्या हम आतंकी हैं? नड्डा बोले – मुझसे ट्यूशन लो!

राज्यसभा में उस वक्त माहौल गर्मा गया जब कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सदन के वेल में CISF जवानों की मौजूदगी पर सवाल उठाए। उन्होंने इस पर उपसभापति को चिट्ठी भी लिखी और मीडिया को जानकारी दी, जिस पर सभापति ने कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि किसी पत्र को पहले मीडिया में देना सदन की परंपराओं का उल्लंघन है। खरगे ने जवाब में कहा कि वह हर सदस्य को व्यक्तिगत रूप से जानकारी नहीं दे सकते थे, इसलिए प्रेस नोट जारी किया। उन्होंने तीखे लहजे में पूछा, “क्या हम आतंकवादी हैं जो वेल में CISF की जरूरत पड़ गई?” उनका कहना था कि जब विपक्ष अहम मुद्दे उठा रहा हो, तब इस तरह की सुरक्षा तैनाती लोकतंत्र के खिलाफ है।

इस पूरे विवाद पर भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता जेपी नड्डा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने विपक्ष के हंगामे को लोकतांत्रिक नहीं, बल्कि अराजक बताया और तंज कसते हुए कहा कि “आप मुझसे ट्यूशन लीजिए, अभी तो विपक्ष में रहने के 30-40 साल और बाकी हैं।” नड्डा ने साफ किया कि सदन में उस दिन सिर्फ मार्शल ही तैनात थे, CISF नहीं। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी खरगे पर झूठे तथ्यों के जरिए सभापति और सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया। असल विवाद तब शुरू हुआ जब बिहार की मतदाता सूची के मुद्दे पर विपक्षी सांसद वेल में पहुंचे और उन्हें रोका गया। इस पूरे घटनाक्रम ने सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव को और गहरा कर दिया है।

रिपोर्ट : कनक चौहान

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