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1050 रुपये लेने के बाद भी सचिव ने बना दिया गलत जन्म प्रमाण पत्र, डीएम और मुख्यमंत्री से की शिकायत

बेटी का सही जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सात माह से भटक रहा पिता, अधिकारियों से कार्रवाई की मांग

बरेली। तहसील आंवला के विकासखंड मझगवां क्षेत्र के आजमपुर निवासी जगदीश चन्द्र वर्मा अपनी पुत्री का सही जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पिछले करीब सात माह से अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। उनका आरोप है कि जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर सचिव के मुंशी को फोन-पे के माध्यम से 1050 रुपये दिए गए, इसके बावजूद उनकी पुत्री की जन्मतिथि गलत दर्ज कर दी गई। जिसकी शिकायत जिला अधिकारी से कोई कार्रवाई नहीं हु उसके बाद मुख्यमंत्री से शिकायत की है।
जगदीश चन्द्र वर्मा के अनुसार उनकी पुत्री रूचि की जन्मतिथि कक्षा एक से आठ तक के शैक्षिक अभिलेखों में 13 मई 2007 दर्ज है। उसने प्राथमिक विद्यालय आजमपुर से कक्षा आठ तक की पढ़ाई की। इसके बाद कक्षा नौ के वर्ष 2022 के अंक प्रमाण पत्र में उसकी जन्मतिथि गलती से 25 जुलाई 2006 दर्ज हो गई।
पिता का कहना है कि जनवरी 2026 में उन्होंने पुत्री का सही जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन किया, लेकिन प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ। इसके बाद 16 जुलाई 2026 को जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर शिकायत की गई। जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी और खंड विकास अधिकारी को जांच कर प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश दिए।
आरोप है कि जांच के बाद भी सचिव द्वारा सही जन्मतिथि के बजाय 31 मई 2007 की रिपोर्ट लगा दी गई। इससे समस्या का समाधान होने के बजाय मामला और उलझ गया। जगदीश चन्द्र का आरोप है कि उन्होंने सचिव के मुंशी अजीत कुमार सिंह को जन्मतिथि सही कराने के लिए फोन-पे के माध्यम से 1050 रुपये भी दिए थे। उनका कहना है कि रुपये लेने के बाद जन्मतिथि सही कराने का आश्वासन दिया गया था।
पीड़ित पिता ने बताया कि उन्होंने मामले की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी दर्ज कराई है, जिसका शिकायत संख्या 92615000062057 है। इसके अलावा जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र की संख्या 20015026015734 तथा अपर सचिव से संबंधित शिकायत संख्या 92615000066791 बताई गई है।
जगदीश चन्द्र वर्मा ने अधिकारियों से मांग की है कि उनकी पुत्री रूचि के कक्षा आठ तक के सही शैक्षिक अभिलेखों के आधार पर जन्म प्रमाण पत्र जारी कराया जाए। साथ ही गलत जन्मतिथि दर्ज करने और कथित रूप से रुपये लेने के मामले की जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

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