चित्रकूट। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने बताया कि जनपद के समस्त साधन सहकारी समितियों एवं अन्य निजी बिक्री केंद्रों जैसे एग्री जंक्शन, आई एफ एफ डी सी, डीसीडीएफ़, पी सी एफ कृषक सेवा केंद्रों आदि को 2190 मैट्रिक टन अर्थात् लगभग 40000 बोरी यूरिया उर्वरक का आवंटन कर दिया गया है जिसे बांदा रैक पॉइंट तथा पी सी एफ बफर गोदाम से उर्वरक बिक्री केंद्रों को भेजी गई है। इसके अतिरिक्त 16 निजी बिक्री केंद्रों जैसे एग्री जंक्शन तथा आई एफ एफ डी सी बिक्री केंद्रों को भी इफको की यूरिया उपलब्ध कराने हेतु इफको कंपनी को निर्देशित किया गया है ताकि उन सभी किसान भाईयों को भी खाद मिल सके जो किसी कारण से समिति के सदस्य नहीं हैं या अभी तक फॉर्मर रजिस्ट्री नहीं करा सके हैं।
गेहूं समेत रबी की अन्य फसलों खड़ी फसलों में टॉप ड्रेसिंग के लिए किसान भाई वैज्ञानिकों द्वारा संस्तुत मात्रा में उर्वरक प्रयोग करें। जिन्होंने मिट्टी का परीक्षण कराया है वो मृदा स्वास्थ्य कार्ड में दी गई उर्वरक मात्रा का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि इस रबी सीजन में अब तक 2580 मैट्रिक टन यूरिया समितियों व अन्य सहकारी बिक्री केंद्रों से वितरित की जा चुकी है। समितियों पर यूरिया खाद की उपलब्धता बनी रहेगी। इसके लिए शासन की योजनानुसार एक रैक यूरिया दो तीन दिनों में जिले को प्राप्त होने वाली है जिसे सीधे सहकारी समितियों पर भेजा जाएगा ताकि कृषकगण अपनी खड़ी फसलों में उपयोग कर सकें।
जनपद के प्रत्येक क्षेत्र में उर्वरकों के वितरण पर सतत् निगरानी रखने हेतु कृषि विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारियों, उर्वरक निरीक्षकों तथा जनपद स्तरीय अधिकारियों की ड्यूटी प्रेक्षक के रूप में लगाई गई है जो निरीक्षण व भ्रमण कर सुनिश्चित करेंगे कि कृषकों को उर्वरक पी0ओ0एस0 मशीन से उनकी जोत बही के अनुसार मिले। प्रत्येेक विक्रय केन्द्र पर रेट बोर्ड/स्टाॅक बोर्ड अद्यतन रखने हेतु प्रभावी अनुश्रवण करें। यूरिया के साथ अन्य किसी भी उत्पाद की टैगिंग कदापि न की जाये। यदि कहीं पर भी टैगिंग/ओवर रेटिंग/काला बाजारी का प्रकरण प्रकाश में आता है तो संबंधित के विरूद्व नियमानुसार विधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। जिलाधिकारी ने जनपद के समस्त किसान भाईयों से अपील की कि जनपद में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है। किसी भी क्षेत्र में किसी भी उर्वरक की कोई कमी नहीं है। किसान भाई अपनी फसल की आवश्यकतानुसार ही उर्वरकों का क्रय एवं प्रयोग करें। आवश्यकता से अधिक उर्वरकों का प्रयोग करने पर खेती की लागत में वृद्वि होगी तथा मिट्टी एवं पर्यावरण के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। अंधाधुंध उर्वरक प्रयोग न केवल कीट व्याधियों को आमंत्रित करता है वरन अन्य पोषक तत्वों की उपलब्धता को भी प्रभावित करता है। अतः जैविक खाद के साथ ही रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग निर्धारित मात्रा में ही किया जाय। संतुलित उर्वरक के प्रयोग से जहां अपेक्षित फलोत्पादन प्राप्त होता है वहीं पर्यावरण व स्वास्थ्य की रक्षा भी होती है।
रिपोर्ट संजय मिश्रा






