हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर के रास्ते पर रविवार सुबह जो कुछ हुआ, वो दिल दहला देने वाला था। दर्शन को उमड़ी भीड़ अचानक अफवाहों की चपेट में आ गई – किसी ने करंट फैलने की बात कही और देखते ही देखते भगदड़ मच गई। इस दर्दनाक हादसे में 12 साल के मासूम सहित आठ लोगों की जान चली गई, जबकि करीब 30 लोग घायल हो गए। अफरा-तफरी में कई श्रद्धालु दीवारों से चिपकी बिजली की तारों से टकरा गए। चश्मदीदों के मुताबिक धक्का-मुक्की इतनी तेज थी कि लोगों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। गायत्री, जो फरीदाबाद से आई थीं, खुद बेहोशी की हालत में अस्पताल पहुंचीं – उन्हें कुछ याद नहीं, बस अफवाह और फिर चीख-पुकार।
दिल्ली से आए कुलदीप ने हादसे को जिंदगी का सबसे खौफनाक पल बताया। उन्होंने कहा कि सीढ़ियों पर हजारों की भीड़ थी, और अचानक अफवाह फैली तो सब कुछ बेकाबू हो गया। कुछ पल में उन्होंने चार लोगों को मृत देखा – फिर सब धुंधला हो गया। हालांकि, इस हादसे ने श्रद्धालुओं को डराया जरूर है, लेकिन उनकी आस्था को हिला नहीं पाया। मंदिर में अब भी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है, लोग पैदल ही माता के दर्शन को निकल रहे हैं। पुलिस अब हर मोर्चे पर मुस्तैद है, लेकिन मन में डर के साथ-साथ एक अटूट विश्वास भी है – मां के दरबार में बुलावा जब आता है, तो कोई हादसा आस्था की राह नहीं रोक सकता।






