बिहार के बांका जिले ने एक बार फिर अपनी मेहनत, नवाचार और विकासोन्मुखी सोच के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी खास पहचान बनाई है। प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में बांका जिले की अनूठी पहल को उस वक्त बड़ी उपलब्धि मिली, जब देश के केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जिले में किए जा रहे प्रयासों की खुलकर सराहना की। इस उपलब्धि के केंद्र में हैं बांका के जिलाधिकारी अंशुल अग्रवाल, जिनके नेतृत्व में जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
दरअसल, भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आमंत्रण पर 12 अक्टूबर 2026 को जिला पदाधिकारी अंशुल अग्रवाल ने राष्ट्रीय मंच पर बांका जिले का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान उन्होंने कटोरिया प्रखंड के लीलावरण गांव में प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों, किसानों की भागीदारी और इन प्रयासों से मिल रहे सकारात्मक परिणामों की विस्तृत जानकारी साझा की।दरअसल, भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आमंत्रण पर 12 अक्टूबर 2026 को जिला पदाधिकारी अंशुल अग्रवाल ने राष्ट्रीय मंच पर बांका जिले का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान उन्होंने कटोरिया प्रखंड के लीलावरण गांव में प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों, किसानों की भागीदारी और इन प्रयासों से मिल रहे सकारात्मक परिणामों की विस्तृत जानकारी साझा की।
बांका के लिए यह गौरव का क्षण इसलिए भी खास रहा, क्योंकि जिले में धरातल पर किए जा रहे कार्यों को अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। जिलाधिकारी अंशुल अग्रवाल ने अपने संबोधन के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति, विभागीय समन्वय और किसानों की सक्रिय भागीदारी एक साथ हो, तो खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बांका जिले में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने अन्य जिलों को भी बांका की इस पहल से सीख लेने और इसे अपनाने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही। केंद्रीय मंत्री की यह सराहना बांका जिला प्रशासन की कार्यशैली और कृषि क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बांका जिले में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने अन्य जिलों को भी बांका की इस पहल से सीख लेने और इसे अपनाने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही। केंद्रीय मंत्री की यह सराहना बांका जिला प्रशासन की कार्यशैली और कृषि क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
लीलावरण गांव में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को वैज्ञानिक मार्गदर्शन दिया जा रहा है। साथ ही, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने और केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों की खेती की लागत कम करना, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना और उनकी आय एवं आजीविका को अधिक मजबूत बनाना है।
इस पूरी पहल में जिलाधिकारी अंशुल अग्रवाल का नेतृत्व और विकास के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राष्ट्रीय मंच पर बांका के प्रयासों को प्रस्तुत करना इस बात का प्रमाण है कि जिले में कृषि के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों को व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। यह उपलब्धि केवल जिला प्रशासन की नहीं, बल्कि कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र, संबंधित संस्थानों और उन मेहनतकश किसानों की भी है, जो नई कृषि पद्धतियों को अपनाकर बदलाव की नई कहानी लिख रहे हैं। इस पूरी पहल में जिलाधिकारी अंशुल अग्रवाल का नेतृत्व और विकास के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राष्ट्रीय मंच पर बांका के प्रयासों को प्रस्तुत करना इस बात का प्रमाण है कि जिले में कृषि के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों को व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। यह उपलब्धि केवल जिला प्रशासन की नहीं, बल्कि कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र, संबंधित संस्थानों और उन मेहनतकश किसानों की भी है, जो नई कृषि पद्धतियों को अपनाकर बदलाव की नई कहानी लिख रहे हैं।
बांका की यह पहल दूसरे जिलों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है। प्राकृतिक खेती आज के दौर में केवल खेती का एक विकल्प नहीं, बल्कि मिट्टी, पानी, पर्यावरण और किसानों के भविष्य को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे में बांका जिले की पहल को राष्ट्रीय मंच पर मिली सराहना जिले के कृषि क्षेत्र के लिए उत्साहवर्धक है।
अंत में यही कहा जा सकता है कि जिलाधिकारी अंशुल अग्रवाल के नेतृत्व में बांका की इस पहल ने जिले का मान बढ़ाया है। केंद्रीय कृषि मंत्री द्वारा की गई सराहना ने यहां के किसानों और कृषि विभाग के प्रयासों को नई ऊर्जा देने का काम किया है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में प्राकृतिक खेती का यह मॉडल और अधिक किसानों तक पहुंचेगा तथा बांका टिकाऊ कृषि के क्षेत्र में अपनी पहचान और मजबूत करेगा। बांका की यह पहल दूसरे जिलों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है। प्राकृतिक खेती आज के दौर में केवल खेती का एक विकल्प नहीं, बल्कि मिट्टी, पानी, पर्यावरण और किसानों के भविष्य को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे में बांका जिले की पहल को राष्ट्रीय मंच पर मिली सराहना जिले के कृषि क्षेत्र के लिए उत्साहवर्धक है।
अंत में यही कहा जा सकता है कि जिलाधिकारी अंशुल अग्रवाल के नेतृत्व में बांका की इस पहल ने जिले का मान बढ़ाया है। केंद्रीय कृषि मंत्री द्वारा की गई सराहना ने यहां के किसानों और कृषि विभाग के प्रयासों को नई ऊर्जा देने का काम किया है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में प्राकृतिक खेती का यह मॉडल और अधिक किसानों तक पहुंचेगा तथा बांका टिकाऊ कृषि के क्षेत्र में अपनी पहचान और मजबूत करेगा।
बांका की मिट्टी से उठी प्राकृतिक खेती की यह पहल अब राष्ट्रीय मंच तक पहुंच चुकी है—और यह जिले के लिए गर्व, किसानों के लिए प्रोत्साहन तथा बेहतर कृषि भविष्य की दिशा में एक सकारात्मक संदेश है। मनोरंजन प्रसाद, ब्यूरो चीफ, बांका।
बांका के DM अंशुल अग्रवाल की पहल का राष्ट्रीय मंच पर बजा डंका, केंद्रीय कृषि मंत्री ने की जमकर सराहना






