राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट से एक अहम सवाल पूछा है—क्या विधेयकों को मंजूरी देने की कोई तय समयसीमा होनी चाहिए? अब सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों वाली संविधान पीठ अगस्त से इस पर सुनवाई शुरू करेगी।
मामला सुप्रीम कोर्ट के 8 अप्रैल के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें कहा गया था कि राज्यपालों को विधानसभा से पास हुए विधेयकों पर फैसला लेने में देर नहीं करनी चाहिए और वे मंत्रिपरिषद की सलाह मानने के लिए बाध्य हैं।
राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 143(1) के तहत अपने 14 सवाल सुप्रीम कोर्ट को भेजे हैं। यह अनुच्छेद राष्ट्रपति को अधिकार देता है कि वह किसी सार्वजनिक महत्व के मुद्दे पर कोर्ट से राय ले सके।
अब बड़ा सवाल है—क्या राज्यपाल और राष्ट्रपति को विधेयकों पर फैसला देने के लिए समयबद्ध किया जाएगा? सुप्रीम कोर्ट की राय से इस संवैधानिक पेच को सुलझाने की उम्मीद है।






