पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण का मतदान खत्म हो चुका है। अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग की ओर हैं, जो जल्द ही आधिकारिक मतदान प्रतिशत जारी करेगा। लेकिन इससे पहले, बीते 17 विधानसभा चुनावों के आंकड़े कुछ बेहद दिलचस्प संकेत दे रहे हैं।इन आंकड़ों से एक पुराना पैटर्न सामने आया है — जब भी बिहार में 60 फीसदी से अधिक मतदान हुआ, लालू प्रसाद यादव की पार्टी ‘राष्ट्रीय जनता दल (RJD)’ सत्ता में लौटने में सफल रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, उच्च मतदान प्रतिशत आमतौर पर ग्रामीण और पिछड़े वर्गों की बड़ी भागीदारी को दर्शाता है, जो परंपरागत रूप से राजद का वोट बैंक माने जाते हैं। यही वजह है कि 60% के पार वोटिंग आंकड़ा RJD के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है।
हालांकि, इस बार मुकाबला कई कोणों से दिलचस्प है — एक तरफ महागठबंधन के चेहरे तेजस्वी यादव हैं, तो दूसरी ओर एनडीए नए नेतृत्व और विकास के मुद्दे पर मैदान में उतरा है।राजनीतिक पंडितों का मानना है कि पहले चरण की वोटिंग अगर 60% से ऊपर जाती है, तो “लालू फैक्टर” एक बार फिर बिहार की राजनीति में अपनी छाप छोड़ सकता है।अब सवाल यह है —क्या 2025 में फिर से लौटेगा “लालू राज” या बदलेगा “बिहार का मिज़ाज”?-






