माननीय मुख्यमंत्री जी,
उत्तराखंड सरकार,
देहरादून।
महोदय,
मैं, खुर्शीद अहमद सिद्दीकी, आपको इस्लाम और मुस्लिम समाज के बारे में उत्तराखंड में जो कुछ बातें प्रचारित हो रही हैं, उनसे मुस्लिम समाज में गहरी चिंता और दुख का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि हम समझते हैं कि किसी भी समाज के बारे में निष्पक्ष और संतुलित विचार महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन यदि एक पक्ष की बातों को एक तरफा तरीके से ही लिया जाए, तो समाज में गलतफहमियां और तनाव उत्पन्न हो सकते हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि दूसरे पक्ष से भी सही जानकारी प्राप्त की जाए ताकि न्यायपूर्ण और संवेदनशील निर्णय लिया जा सके।
हमारे मुस्लिम समाज के बारे में कुछ ऐसी बातें की जा रही हैं, जो न केवल भ्रामक हैं बल्कि समाज के बीच नफरत और अविश्वास को बढ़ावा देती हैं। इस पत्र के माध्यम से हम आपसे कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर आपके ध्यानाकर्षण की अपील करते हैं।
- मुसलमानों में जिहाद फि सबिलिलाह:
कई बार यह आरोप लगाया गया है कि मुसलमानों को जिहाद के नाम पर हिंसा के लिए उकसाया जाता है और उन्हें अलगाववाद की ओर मोड़ा जा रहा है। लेकिन सचाई यह है कि भारत के मुसलमानों ने हमेशा देश की एकता और अखंडता के लिए योगदान दिया है। अल्लामा फजल खैराबादी द्वारा दिया गया जिहाद का फतवा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक अहम हिस्सा था, लेकिन उसके बाद, खासकर उत्तराखंड में, मुस्लिम समाज ने हमेशा देश की धारा के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने का प्रयास किया है। कश्मीर में होने वाले अलगाववाद में उत्तराखंड व भारत के मुसलमानों का कोई भी योगदान नहीं रहा है। उत्तराखंड के मुसलमानों को “लव जिहाद”, “लैंड जिहाद” या “थूक जिहाद” जैसे शब्दों से जोड़कर बदनाम किया जा रहा है, जो न केवल निराधार हैं, बल्कि यह हमारी धर्मनिष्ठा और आस्थाओं का भी अपमान है। हम आपसे निवेदन करते हैं कि इन प्रकार के बयानों पर रोक लगाई जाए और समाज के बीच भाईचारे और शांति को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जाए।
- मदरसों में कट्टरता का पाठ पढ़ाया जाता है:
मदरसा शिक्षा प्रणाली को लेकर भी कई प्रकार की भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं। यह आरोप लगाया जाता है कि मदरसों में बच्चों को कट्टरता और हिंसा की शिक्षा दी जाती है, जो कि बिल्कुल गलत है। मदरसे में दी जाने वाली शिक्षा धार्मिक और बुनियादी तालीम होती है, जिसका उद्देश्य बच्चों को एक बेहतर इंसान बनाना और उनके बौद्धिक विकास को बढ़ावा देना है। मदरसों में दी जाने वाली तालीम में एक स्वस्थ समाज की स्थापना के लिए आवश्यक मूल्य, जैसे संयम, ईमानदारी, और इज्जत का पाठ दिया जाता है। इसके अलावा, मदरसे भारत के कई कमजोर और गरीब बच्चों के लिए एकमात्र शिक्षा का माध्यम बने हैं। हमें मदरसों को एक सकारात्मक दृष्टिकोण से देखना चाहिए और समझना चाहिए कि वे भारतीय समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। मदरसों के निज़ाम को छिन बिन करना न्याय पूर्ण नहीं हैं।
- उत्तराखंड में मुसलमानों के प्रति बढ़ती नफरत और डेमोग्राफिक बदलाव का आरोप:
उत्तराखंड में मुस्लिम समाज के खिलाफ एक तरफा नफरत और सांप्रदायिक तनाव बढ़ते हुए देखा जा रहे हैं हालिया घटना मसूरी में हिंदू रक्षा दल द्वारा बुल्ले शाह के पुराने मजार को ध्वस्त कर समाज में अराजकता फैलानी है। कुछ असामाजिक तत्वों ने मुस्लिम समाज को समाज के लिए खतरे के रूप में प्रस्तुत किया है, और यही चीज़ डेमोग्राफिक बदलाव के नाम पर प्रचारित की जा रही है। यह विचार न केवल पूरी तरह से आधारहीन हैं, बल्कि समाज के बीच अविश्वास और भय की भावना पैदा करते हैं। उत्तराखंड में मुसलमानों और मसीही समाज की संख्या कम है और उनका समाज यहाँ की सामाजिक विकास और विविधता में एक अहम भूमिका निभाता है। इन नफरत भरे विचारों को बढ़ावा देने से समाज में असंतोष पैदा होता है जो किसी भी सूरत में हमारी राज्य की अखंडता के लिए लाभकारी नहीं हो सकता।
हम आपके सामने इन मुद्दों को रखना चाहते हैं ताकि आप इन पर ग़ौर फरमाएं और राज्य के सभी समुदायों के बीच समानता, भाईचारे और सौहार्दपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाएं। हमें विश्वास है कि आपकी नेतृत्व क्षमता में उत्तराखंड एक आदर्श राज्य बनेगा, जहाँ सभी धर्मों, जातियों और समुदायों के बीच सौहार्द और शांति बनी रहेगी।
अंत में, हम आपसे निवेदन करते हैं कि राज्य में हो रही इन नफरती वारदातों पर रोक लगाने के लिए संबंधित अधिकारियों को आदेशित करने की कृपा करे ताकि अराजक तत्व की आवाजों को रोकने के लिए और समाज के हर वर्ग के लिए एक सकारात्मक माहौल तैयार करने के लिए कदम उठाने में मदद मिले।
हम आपके उत्तर का सम्मानपूर्वक इंतजार करेंगे।
आपके आभारी,
मुस्लिम समाज से एक चिंतक,
खुर्शीद अहमद सिद्दीकी (गुलाम ए मुस्तफा)






