बरेली। नगर निगम के अंतर्गत संचालित कान्हा उपवन में गोवंश की मौतों को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। रविवार को सामने आई तस्वीरों और स्थानीय संगठनों के आरोपों के बाद गौशाला में गोवंश की देखभाल, चारे की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि आधा दर्जन से अधिक मृत गोवंश को ट्रॉली में भरकर गोपनीय तरीके से ले जाया जा रहा था। हिंदू संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने ट्रॉली को रोककर विरोध शुरू कर दिया।
हालांकि गोवंश की मौतों की वास्तविक संख्या, उनके मरने के कारण और चारे को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की आधिकारिक जांच और पुष्टि जरूरी है।
मृत गोवंश से भरी ट्रॉली रोकने का दावा
हिंदू संगठन से जुड़े लोगों का आरोप है कि कान्हा उपवन से मृत गोवंश को ट्रॉली में भरकर ले जाया जा रहा था। जानकारी मिलने पर कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और ट्रॉली को रोक लिया। इसके बाद गौशाला की व्यवस्था को लेकर विरोध शुरू हो गया।
सामने आई तस्वीरों में एक वाहन में कई मृत गोवंश दिखाई दे रहे हैं। तस्वीर पर मौजूद लोकेशन और समय संबंधी जानकारी इसे 31 अगस्त की रात का बताया जा रहा है। संगठन के पदाधिकारियों ने पूरे मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
चारे की गुणवत्ता पर भी गंभीर आरोप
गौशाला की व्यवस्था को लेकर सबसे गंभीर आरोप गोवंश को दिए जाने वाले चारे से जुड़ा है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि यहां गोवंश को खराब और सड़ा हुआ चारा दिया जा रहा है। इसे लेकर उन्होंने पशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव की जांच कराने की मांग की है।
यह आरोप गंभीर है, इसलिए प्रशासन द्वारा चारे के नमूने लेकर उनकी वैज्ञानिक जांच कराना महत्वपूर्ण होगा। जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि उपलब्ध कराया जा रहा चारा निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं।
मेयर और नगर आयुक्त की जवाबदेही पर सवाल
कान्हा उपवन नगर निगम की व्यवस्था के अंतर्गत आता है। ऐसे में घटना के बाद मेयर और नगर आयुक्त की प्रशासनिक जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। गौशाला के संचालन पर कितना बजट खर्च किया जा रहा है, चारे की खरीद कैसे होती है, पशुओं का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण होता है या नहीं और मौत होने पर उसका रिकॉर्ड किस तरह रखा जाता है—इन सभी बिंदुओं की जांच की मांग उठ रही है।
यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि गौशाला की प्रत्यक्ष देखरेख के लिए कौन-कौन अधिकारी और कर्मचारी जिम्मेदार हैं तथा हाल में कितने गोवंश की मौत हुई है।
बड़ी संख्या में गायों की बदहाली का आरोप
प्रदर्शनकारियों की ओर से गौशाला में करीब 1500 या उससे अधिक गायों की स्थिति खराब होने का दावा भी किया जा रहा है। इस आंकड़े की अभी स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पशुपालन विभाग और नगर निगम की संयुक्त टीम द्वारा गौशाला में मौजूद पशुओं की वास्तविक संख्या और उनकी स्वास्थ्य स्थिति सार्वजनिक किए जाने की मांग की जा रही है।
यदि किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों या ठेकेदारों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
मुख्यमंत्री के गौ-संरक्षण अभियान के बीच उठे सवाल
उत्तर प्रदेश सरकार लगातार गौ-संरक्षण और निराश्रित गोवंश की बेहतर देखभाल पर जोर देती रही है। ऐसे में बरेली की नगर निगम संचालित गौशाला से सामने आए आरोप व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि गोवंश की मौत किन कारणों से हुई और मृत पशुओं को ट्रॉली में कहां तथा किस प्रक्रिया के तहत ले जाया जा रहा था। प्रशासन से निष्पक्ष जांच, पोस्टमार्टम/पशु चिकित्सकीय परीक्षण से मौत के कारण स्पष्ट करने, चारे की गुणवत्ता जांचने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की जा रही है।





