उत्तर प्रदेश सरकार ने किरायेदारी को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब 10 साल तक की अवधि वाले किरायानामों पर स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस में राहत दी गई है। कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि अब भवन स्वामी और किरायेदार दोनों को किरायानामा लिखित रूप में तैयार करने और उसकी रजिस्ट्री कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे विवाद कम होंगे और किरायेदारी अधिनियम का बेहतर पालन हो सकेगा।
नई व्यवस्था के तहत औसत वार्षिक किराए के आधार पर अधिकतम स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस तय की गई है। – वार्षिक किराया 2 लाख रुपए तक: 1 वर्ष तक 500 रुपए, 1 से 5 वर्ष तक 1500 रुपए, 5 से 10 वर्ष तक 2000 रुपए। – वार्षिक किराया 2 लाख 1 रुपए से 6 लाख तक: 1 वर्ष तक 1500 रुपए, 1 से 5 वर्ष तक 4500 रुपए, 5 से 10 वर्ष तक 7500 रुपए। – वार्षिक किराया 6 लाख 1 रुपए से 10 लाख तक: 1 वर्ष तक 2500 रुपए, 1 से 5 वर्ष तक 6000 रुपए, 5 से 10 वर्ष तक 10000 रुपए। सरकार का मानना है कि इससे लोग किरायानामे की रजिस्ट्री कराने में हिचकिचाएंगे नहीं और किरायेदारी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी। यह छूट केवल किराए के अनुबंधों पर लागू होगी, जबकि टोल या खनन पट्टे इस दायरे में नहीं आएंगे।
रिपोर्ट : ज्योति नौटियाल






