दिल्ली की सड़कों पर सोमवार को जो हुआ, उसने सिर्फ विपक्ष को नहीं, पूरे देश को सोचने पर मजबूर कर दिया।
चुनाव आयोग तक शांतिपूर्वक मार्च कर रहे सांसदों को जब पुलिस ने हिरासत में लिया, तो आवाज़ महाराष्ट्र से भी उठी — और वो थी उद्धव ठाकरे की। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने साफ कहा:
“पूरी दुनिया देख रही है कि भारत में लोकतंत्र की हत्या की जा रही है।”ये सिर्फ बयान नहीं था, बल्कि उस बेचैनी की गूंज थी जो आज हर जागरूक नागरिक के भीतर पल रही है।
ठाकरे ने कहा कि ये लड़ाई किसी पार्टी से नहीं, बल्कि उस वोट चोरी के खिलाफ है, जो भारत के सबसे पवित्र अधिकार – मतदान पर हमला करती है।
उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा,
“लोकतंत्र को सरकार ने अपने ही हाथों कलंकित कर दिया है।”जब नेता अपनी बात तक नहीं कह सकते, जब सड़क पर उतरने पर उन्हें रोका जाए, तो सवाल उठना लाज़मी है —
क्या सच में हमारा लोकतंत्र इतना कमज़ोर हो गया है कि एक मार्च भी बर्दाश्त नहीं कर पाता?उद्धव ठाकरे की ये प्रतिक्रिया सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि उस लोकतांत्रिक आत्मा की पुकार है, जो आज चुप कराने की कोशिश की जा रही है।






