असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने सोमवार को एक सच्चाई से पर्दा उठाया — उन्होंने कहा कि राज्य के कई इलाकों, खासकर नदी किनारे बसे ‘चार’ क्षेत्रों में, मतदाता सूची में आज भी मृतक और प्रवासी लोगों के नाम दर्ज हैं।
इतना ही नहीं, इन जगहों पर हर बार 100% मतदान दिखाया जाता है, जबकि ज़मीनी हकीकत कुछ और है।
“शादी हो चुकी बेटियों के नाम तक लिस्ट से नहीं हटते,” उन्होंने कहा — एक ऐसा बयान जो बताता है कि सिस्टम में कुछ तो ठीक नहीं है।
लेकिन सिर्फ शिकायत नहीं, समाधान की बात भी की गई।
CM सरमा का मानना है कि “SIR” यानी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया, इन गड़बड़ियों को खत्म करने का एक ठोस तरीका है।
इस प्रक्रिया में वोटर लिस्ट को आधार से जोड़ा जाएगा, जिससे गलत नामों की पहचान करके उन्हें हटाया जा सकेगा — और फर्जी मतदान पर रोक लग सकेगी।
सरमा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वो SIR का विरोध तो कर रहे हैं, लेकिन खुद नहीं समझ पा रहे कि असल में चाहते क्या हैं।
उन्होंने तंज किया, “अगर वोटर लिस्ट इतनी ही गड़बड़ है, तो कांग्रेस हिमाचल, कर्नाटक और तेलंगाना में कैसे जीत गई?”
मुख्यमंत्री ने साफ कहा —
“विपक्ष को सुधार में दिलचस्पी नहीं, सिर्फ राजनीति करनी है।”
SIR जैसी प्रक्रिया ही पारदर्शी और निष्पक्ष चुनावों की असली गारंटी है।
इस पूरी बात का सार बस इतना है —
साफ-सुथरे चुनाव सिर्फ बहस से नहीं, सुधार की हिम्मत से आते हैं।
और अगर वोट की गरिमा बचानी है, तो सिस्टम की सफाई जरूरी है।






