संभल हिंसा मामले में मुख्य आरोपी बताए गए मुल्ला अफरोज को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागु की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA के तहत हिरासत को रद्द कर दिया। अदालत ने यूपी सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पुलिस हिरासत में दर्ज कथित कबूलनामे को अकेले NSA के तहत किसी व्यक्ति को निरुद्ध रखने का आधार नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने सरकार की ओर से की गई निवारक हिरासत की कार्रवाई को कानून के अनुरूप नहीं माना।
मुल्ला अफरोज की ओर से यूपी सरकार की NSA कार्रवाई को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। 9 सितंबर को सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद सरकार ने 20 सितंबर को अपना जवाब दाखिल किया और मंगलवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।
मामला 24 नवंबर 2024 को संभल में शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है। हिंदू पक्ष की ओर से मस्जिद को श्रीहरिहर मंदिर होने का दावा किए जाने के बाद अदालत के आदेश पर सर्वे कराया गया था। दूसरे चरण के सर्वे के दौरान बड़ी संख्या में लोग जमा हुए और हिंसा भड़क गई। पुलिस पर पथराव और फायरिंग की घटनाओं में पांच लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
हिंसा के बाद संभल कोतवाली और नखासा थाने में कई मुकदमे दर्ज किए गए। पुलिस कार्रवाई में बड़ी संख्या में लोगों को आरोपी बनाया गया और कई अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इसी मामले में मुल्ला अफरोज को भी गिरफ्तार किया गया था। उन्हें मामले में मुख्य साजिशकर्ता के तौर पर पुलिस की ओर से बताया गया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद अक्टूबर 2025 में उत्तर प्रदेश सरकार ने मुल्ला अफरोज पर NSA के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें दोबारा हिरासत में ले लिया था। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा था कि उनकी रिहाई से क्षेत्र में दोबारा हिंसा भड़कने और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी।
मुल्ला अफरोज के अधिवक्ता तौफीक अहमद के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश में फैसले से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण बिंदु आदेश अपलोड होने के बाद स्पष्ट होंगे। मामले में मुख्य बहस सीनियर एडवोकेट दिव्येश प्रताप सिंह ने की।
संभल हिंसा से जुड़े मामले में शारिक साठा का नाम भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार वह फरार है और उसके खिलाफ रेड कॉर्नर लुक आउट नोटिस जारी किया जा चुका है। मामले में वारिस और गुलाम के खिलाफ भी NSA के तहत कार्रवाई की जा चुकी है।






