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गुरु की शरणागति होकर ही जीवात्मा का कल्याण-स्वामी श्री धनंजयानंद जी

नावकोठी.
प्रखंड के द्वारिका पैलेस होटल में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के द्वारा श्री गुरु पूजा महोत्सव का आयोजन गुरूवार को किया गया.प्रवचन करते हुए संस्थान के संस्थापक व संचालक दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज के शिष्य स्वामी श्री धनंजयानंद जी ने कहा कि पुर्ण गुरु की पहचान है ब्रह्मज्ञान.महाराष्ट्र में जन्में भक्त नामदेव के जीवन चारित्र को बड़े ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया.भक्त नामदेव के प्रेम के वशीभूत होकर भगवान कई बार प्रकट हो जाया करते थे, मगर स्वयं भगवान उन्हें समझाते हैं कि नामदेव मेरे वास्तविक रूप को जानना हैं तो गुरु विशोभा खेचर की शरण में जाओ.गुरु की शरणागति होकर ही जीवात्मा का कल्याण है.आगे साध्वी विदुषी सुमति भारती जी ने बताया कि सामाजिक नैतिक व बौद्धिक प्रगति के लिए प्रत्येक व्यक्ति को गुरु की आवश्यकता है.गुरु बिनु भव निधि तरइ न कोई.जौं बिरंचि संकर सम होई.आज का मनुष्य अधिक सुविधा सम्पन्न,साधन सम्पन्न है परंतु सुख,संतोष के दृष्टि से देखे तो बहुत ज्यादा दिनहीन मलिन है.कारण मानवीय गरिमा को गिराने वाला आचरण,मर्यादाओं को तोड़ती परंपरा व्यक्ति और परिवार को संवेदनहीन बनाती जा रही है. जिस कारण मानव अवसाद ग्रसित हो रहा है जिसके इलाज में विज्ञान असफल है.रामचारितमानस हो या गीता हमें गुरु के शरण में जाने को कहती है.अर्जुन भी जब अवसाद से ग्रसित था तब भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें ज्ञान प्रदान किया और अवसाद से मुक्त किया.गुरु शिष्य को एक नया जन्म देता है इसलिए वह ब्रह्मा हैं,गुरु शिष्य की रक्षा करता है इसलिए वह विष्णु समान हैं और वह साथ में शिष्य के अवगुणों का संहार भी करता है इसलिए वह शिव समान है.आइये ऐसे पूर्ण गुरु की तलाश करे जो शास्त्र सम्मत है,जो तत्वदर्शी हो वहां जाने से ही हमारा कल्याण संभव है.
मंच पर साध्वी सरिता भारती,गायक पवन, राहुल एवं रामचन्द्र उपस्थित थे.प्रवचन सुनने सैंकड़ो की भीड़ उमड़ पड़ी.

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