लोकेशन – समस्तीपुर
रिपोर्ट – नवनीत कुमार झा
इंडियन बैंक रोसड़ा शाखा में परीक्षा फॉर्म के चालान जमा करने पहुंचे शिक्षकों को हुई परेशानी, व्यवस्था पर उठाए सवाल
रोसड़ा। इंटरमीडिएट एवं मैट्रिक वार्षिक परीक्षा 2027 के परीक्षा फॉर्म से संबंधित चालान जमा करने के लिए इंडियन बैंक की रोसड़ा शाखा पहुंचे शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को घंटों इंतजार करना पड़ा। एक शिक्षक ने सोशल मीडिया पर पोस्ट के माध्यम से अपनी परेशानी साझा करते हुए बैंकिंग व्यवस्था और परीक्षा शुल्क जमा करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
शिक्षक के अनुसार, वह करीब 10:30 बजे चालान जमा करने के लिए बैंक पहुंचे थे। उस समय बैंक के बाहर शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों की लंबी कतार लगी हुई थी। वह भी कतार में शामिल हो गए। इसके बाद करीब पांच घंटे तक उन्हें बैंक में अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। इस दौरान भीषण गर्मी के बीच शिक्षक और प्रधानाध्यापक कतार में खड़े रहे।
शिक्षक ने अपनी पोस्ट में बताया कि करीब पांच घंटे इंतजार करने के बाद बैंक की ओर से सर्वर काम नहीं करने की जानकारी दी गई। इसके बाद उन्हें बिना चालान जमा किए ही वापस लौटना पड़ा। लंबे समय तक इंतजार के बाद काम नहीं होने से शिक्षकों में निराशा देखी गई।
शिक्षक ने अपनी पोस्ट में कहा कि परीक्षा फॉर्म और शुल्क जमा करने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शिक्षकों को घंटों बैंक की कतार में खड़ा होना पड़ता है, जिससे विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य काम को आसान और तेज बनाना है, तो ऐसी स्थिति में शिक्षकों को घंटों बैंक में इंतजार क्यों करना पड़ रहा है।
परीक्षा शुल्क जमा करने की प्रक्रिया में बदलाव की मांग
शिक्षक ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से परीक्षा शुल्क जमा करने की व्यवस्था पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है। उन्होंने सुझाव दिया कि किसी एक बैंक पर निर्भर रहने के बजाय सभी अधिकृत अथवा राष्ट्रीयकृत बैंकों में परीक्षा शुल्क जमा करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि तकनीकी रूप से संभव होने पर छात्र स्वयं ऑनलाइन परीक्षा फॉर्म भरें और परीक्षा शुल्क जमा करें, जबकि विद्यालय की जिम्मेदारी केवल फॉर्म के सत्यापन एवं प्रमाणीकरण तक सीमित रखी जाए।
शिक्षक की प्रतिक्रिया : “करीब पांच घंटे बैंक की कतार में खड़े रहने के बाद बताया गया कि सर्वर काम नहीं कर रहा है। परीक्षा फॉर्म का चालान जमा करने के लिए शिक्षकों को इस तरह घंटों बैंक में खड़ा होना पड़ रहा है। परीक्षा शुल्क जमा करने की व्यवस्था को सरल बनाया जाना चाहिए, ताकि शिक्षक अपना समय विद्यालय और विद्यार्थियों को दे सकें।”







