मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इस्तीफे की मांग अब और तेज होती दिख रही है। सोमवार को पूर्व नौकरशाहों, पूर्व अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक समूह ने उनके खिलाफ ‘जनता का महाभियोग’ नोटिस और चार्जशीट जारी की। समूह में पूर्व केंद्रीय गृह सचिव जीके पिल्लई, दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग और सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव समेत कई लोग शामिल हैं।
समूह की योजना चुनाव आयोग पहुंचकर यह नोटिस सौंपने की थी, लेकिन प्रतिनिधिमंडल को आयोग के कार्यालय तक पहुंचने से रोक दिया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, आयोग की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई थी। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नोटिस और उसमें लगाए गए आरोपों की जानकारी सार्वजनिक की।
नोटिस में लगाए गए छह आरोप क्या हैं?
नोटिस में ज्ञानेश कुमार पर चुनाव आयोग के सामूहिक कामकाज को कमजोर करने का आरोप लगाया गया है। समूह का दावा है कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR जैसे महत्वपूर्ण फैसलों में पर्याप्त चर्चा, सलाह-मशविरा और रिकॉर्डेड कार्यवाही नहीं हुई।
दूसरा आरोप वैधानिक Form-6 में कथित अनधिकृत बदलाव से जुड़ा है। समूह ने सवाल उठाया है कि आयोग के भीतर आपत्तियों के बावजूद संशोधित फॉर्म का इस्तेमाल कैसे हुआ।
तीसरे आरोप में ECINET के जरिए मतदाता सूची के कामकाज के कथित केंद्रीकरण की बात कही गई है। नोटिस में दावा किया गया है कि इससे निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों यानी ERO की वैधानिक भूमिका प्रभावित हुई।
चौथा आरोप SIR के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाता नाम प्रभावित होने से संबंधित है। समूह ने दावा किया है कि इस प्रक्रिया का असर महिलाओं, गरीबों, प्रवासियों, अल्पसंख्यकों और बुजुर्गों पर पड़ा। यह समूह द्वारा लगाया गया दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि अलग से आवश्यक है।
पांचवें आरोप में चुनाव आयोग की राजनीतिक निष्पक्षता से समझौता किए जाने का आरोप लगाया गया है। वहीं छठे आरोप में वैधानिक जिम्मेदारियों और प्रक्रियाओं के कथित बार-बार उल्लंघन की बात कही गई है।
समूह ने इन आरोपों के आधार पर ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग की है। हालांकि, नोटिस में लगाए गए ये आरोप समूह के दावे हैं और इन्हें किसी न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। पूर्व खुफिया अधिकारी यशोवर्धन आजाद ने भी कहा है कि ‘जनता के महाभियोग’ की इस पहल को कानूनी मान्यता हासिल नहीं है।






