बरेली। बरेली की भाजपा राजनीति में अंदरखाने चल रही कथित खींचतान अब खुलकर चर्चा में आ गई है। मेयर डॉ. उमेश गौतम और कैंट विधायक संजीव अग्रवाल के बीच राजनीतिक मतभेदों को लेकर एक स्थानीय चैनल की हालिया रिपोर्ट के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज है। सवाल उठ रहा है कि क्या यह केवल मुद्दों पर असहमति है या 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले स्थानीय भाजपा में नए राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं।
निजी कार्यक्रम के बाद उसी चैनल की रिपोर्ट बनी चर्चा का विषय
कुछ दिन पहले मेयर डॉ. उमेश गौतम इसी मीडिया संस्थान से जुड़े एक निजी कार्यक्रम में शामिल हुए थे। अब उसी चैनल द्वारा मेयर और विधायक के कथित मतभेदों को प्रमुखता से दिखाए जाने के बाद राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं। हालांकि निजी कार्यक्रम में मेयर की मौजूदगी और बाद में प्रसारित रिपोर्ट के बीच किसी तरह का प्रत्यक्ष संबंध साबित करने वाला कोई तथ्य सामने नहीं आया है।
पुराने घटनाक्रम भी दे रहे सियासी संकेत
बरेली नगर निगम की हालिया राजनीति पर नजर डालें तो कुछ घटनाक्रम ऐसे जरूर रहे हैं, जिनसे स्थानीय भाजपा के भीतर अलग-अलग राजनीतिक प्राथमिकताओं की चर्चा को बल मिला। जुलाई 2026 में नगर निगम उपसभापति चुनाव इसका बड़ा उदाहरण रहा। प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक मेयर उमेश गौतम की पसंद पूर्व उपसभापति सर्वेश रस्तोगी बताए गए थे, जबकि पार्टी के कई पार्षद उन्हें दोबारा मौका दिए जाने के पक्ष में नहीं थे।
पार्षदों ने वरिष्ठ नेताओं तक पहुंचाई थी बात
रिपोर्टों के अनुसार पार्षदों ने इस संबंध में पार्टी संगठन के वरिष्ठ नेताओं के साथ कैंट विधायक संजीव अग्रवाल समेत अन्य जनप्रतिनिधियों तक अपनी बात पहुंचाई थी। बाद में भाजपा संगठन ने पूनम राठौर को अधिकृत प्रत्याशी बनाया। इस घटनाक्रम को स्थानीय स्तर पर संगठन, पार्षदों और मेयर खेमे के बीच बदलते शक्ति-संतुलन के तौर पर भी देखा गया।
नगर निगम में मेयर का प्रभाव भी बरकरार
हालांकि तस्वीर का दूसरा पक्ष भी महत्वपूर्ण है। जून 2026 में नगर निगम कार्यकारिणी के छह सदस्यों का चुनाव निर्विरोध हुआ था। उस समय इसे मेयर उमेश गौतम के कार्यकाल में लगातार नौवीं बार निर्विरोध कार्यकारिणी चुनाव के रूप में रिपोर्ट किया गया। ऐसे में यह कहना सही नहीं होगा कि नगर निगम की राजनीति में मेयर का प्रभाव समाप्त हो गया है।
पहले एक मंच पर भी दिखे मेयर और विधायक
पुराने राजनीतिक घटनाक्रम यह भी बताते हैं कि मेयर उमेश गौतम और विधायक संजीव अग्रवाल हमेशा आमने-सामने नहीं रहे। 2023 के नगर निकाय चुनाव के दौरान उमेश गौतम के नामांकन में संजीव अग्रवाल सहित भाजपा के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे थे। लोकसभा चुनाव और पार्टी के दूसरे कार्यक्रमों में भी दोनों नेता एक मंच पर दिखाई देते रहे हैं।
स्थायी राजनीतिक दुश्मनी कहना अभी जल्दबाजी
इसी कारण मौजूदा घटनाक्रम को सीधे व्यक्तिगत या स्थायी राजनीतिक दुश्मनी घोषित करना जल्दबाजी होगी। फिलहाल इसे बरेली भाजपा के भीतर मुद्दों पर असहमति, राजनीतिक प्राथमिकताओं के अंतर और बदलते स्थानीय समीकरणों के संदर्भ में देखना अधिक तथ्यपरक होगा।
‘मोहम्मद गजनवी’ के नाम की पुष्टि जरूरी
हालिया चर्चाओं में “मोहम्मद गजनवी” को विधायक बताते हुए उनका नाम भी सामने आया है। हालांकि उपलब्ध विश्वसनीय चुनावी रिकॉर्ड में बरेली के किसी वर्तमान विधायक के रूप में इस नाम की पुष्टि नहीं होती। इसलिए इस नाम और उससे जुड़े कथित बयान अथवा भूमिका को प्रकाशित करने से पहले स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
2027 से पहले शक्ति प्रदर्शन का संकेत?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बरेली भाजपा में यह केवल मुद्दों पर असहमति है या 2027 से पहले राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन शुरू हो चुका है? मेयर उमेश गौतम और विधायक संजीव अग्रवाल का मौजूदा विवाद पर स्पष्ट आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही वास्तविक तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।






