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उर्दू अदब का चमकता सितारा ताहिर फ़राज़ अब नहीं रहे: शायरी की दुनिया में अपूरणीय क्षति….

उर्दू अदब और शायरी की दुनिया के मशहूर नाम ताहिर फ़राज़ अब हमारे बीच नहीं रहे। मोहब्बत, एहसास और इंसानियत के रंगों से भरी उनकी शायरी ने लाखों दिलों को छुआ था। उनके इंतकाल की ख़बर से उर्दू अदब के चाहने वालों में शोक की लहर दौड़ गई है।
ताहिर फ़राज़ उन शायरों में से थे जिनकी नज़्मों और ग़ज़लों में एक खास नफ़ासत, मिठास और दर्द था।
उनकी लिखी पंक्तियाँ:
“अम्बर की ये ऊंचाई, सागर की ये गहराई, तेरे मन में है समाई, माई… ओ माई!”
और
“जिंदगी तेरे तआक्कुब में हम, इतना चलते हैं कि मर जाते हैं…”
आज भी मुशायरों में उसी ताज़गी के साथ सुनाई देती हैं।
उनकी एक और मशहूर लाइन “बहुत खूबसूरत हो तुम…” ने उन्हें भारत से लेकर विदेशों तक पहचान दिलाई। रामपुर की गलियों से निकलकर दुनिया के मंच तक पहुँचने वाले ताहिर फ़राज़ ने अपनी पहचान परंपराओं को सँभालते हुए बनाई।
शायरी की दुनिया में उन्हें “मोहब्बत का काशिफ़”, “दिलों को छू लेने वाले शायर” और “ग़ज़ल का सलीकेदार फ़नकार” भी कहा गया। उनकी आवाज़ में जो जादू था और जो एहसास उनके कलाम में दिखाई देता था, वही आज उन्हें अन्य शायरों से अलग खड़ा करता है।
उनके इंतकाल पर साहित्यिक दुनिया और चाहने वालों ने गहरा दुख जताया है। सोशल मीडिया पर भी उन्हें श्रद्धांजलि देने का सिलसिला जारी है।
अल्लाह तआला से दुआ है कि ताहिर फ़राज़ साहब को जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मुकाम अता हो, उनकी रूह को सुकून मिले और परिवार को सब्र-ए-जमील मिले।
उन्हें भले ही दुनिया छोड़े हुए आज एक दिन ही हुआ हो, पर उनकी शायरी हमेशा ज़िंदा रहेगी।

रिपोर्ट: डॉ इफ्तखार त्यागी

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