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बरेली में मेयर उमेश गौतम के रक्षाबंधन समारोह में भगदड़ का दावा, वायरल वीडियो में 2 बच्चों की मौत की चर्चा; व्यवस्थाओं पर उठे बड़े सवाल

बरेली। रक्षाबंधन के मौके पर बरेली क्लब मेला ग्राउंड में आयोजित मेयर उमेश गौतम के रक्षाबंधन समारोह के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भारी भीड़ के बीच भगदड़ जैसी स्थिति बनने और वायरल वीडियो में दो बच्चों की मौत होने का दावा किए जाने के बाद आयोजन की सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन और प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, खबर लिखे जाने तक दो बच्चों की मौत की पुलिस या प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

कार्यक्रम का आयोजन महापौर उमेश गौतम एवं पार्थ गौतम फाउंडेशन के सौजन्य से किया गया था। आयोजकों की ओर से कार्यक्रम में 20 हजार से अधिक माताओं और बहनों के पहुंचने का दावा किया गया। समारोह से सामने आई तस्वीरों और वीडियो में मैदान में भारी भीड़ दिखाई दे रही है। बड़ी संख्या में महिलाएं खुले मैदान में बैठी नजर आ रही हैं। कुछ तस्वीरों में महिलाओं के मिट्टी पर बैठे होने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों को बुलाए जाने के बावजूद बैठने की पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं की गई।

कार्यक्रम के बाद सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो तेजी से वायरल हुए। इन वीडियो के साथ यह दावा किया जा रहा है कि कार्यक्रम में मची अफरा-तफरी और भगदड़ जैसी स्थिति के दौरान दो बच्चों की मौत हो गई। कई अन्य लोगों के घायल होने की भी चर्चा है। फिलहाल इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए वास्तविक स्थिति पुलिस-प्रशासन के बयान और जांच के बाद ही साफ होगी।

सूत्रों के मुताबिक, कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए अलग-अलग वार्डों से बड़ी संख्या में महिलाओं को बुलाया गया था। सभासदों को भी महिलाओं को कार्यक्रम स्थल तक लाने की जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है। आरोप है कि लोगों को कार्यक्रम तक पहुंचाने पर तो जोर दिया गया, लेकिन समारोह समाप्त होने के बाद उनकी सुरक्षित वापसी के लिए कोई व्यापक इंतजाम नहीं था। कई महिलाओं को किराए के निजी साधनों से वापस जाते देखा गया।

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि आयोजकों को पहले से अनुमान था कि समारोह में 20 हजार या उससे अधिक लोग पहुंचेंगे, तो इतनी विशाल भीड़ के लिए प्रवेश और निकास की क्या योजना बनाई गई थी? क्या पर्याप्त बैरिकेडिंग की गई थी? मेडिकल सहायता, एम्बुलेंस, पेयजल और इमरजेंसी निकासी के रास्तों की व्यवस्था किस स्तर पर थी?

इसी के साथ पुलिस को कार्यक्रम की पूर्व जानकारी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि कार्यक्रम में हजारों लोगों के पहुंचने की संभावना पहले से थी, तो पुलिस और प्रशासन को इसकी सूचना किस स्तर पर दी गई थी? कार्यक्रम स्थल पर पर्याप्त पुलिस बल और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था थी या नहीं, यह भी जांच का विषय बन गया है।

कार्यक्रम के दौरान पार्थ गौतम ने मीडिया से बातचीत में दावा किया था कि अनुमानित संख्या से कहीं अधिक माताएं और बहनें समारोह में पहुंचीं। आयोजन में महिलाओं के लिए रक्षाबंधन उपहार और भोजन की व्यवस्था भी की गई थी।

अब पूरे मामले में आयोजन की भव्यता से ज्यादा उसके प्रबंधन की चर्चा हो रही है। वायरल वीडियो में दो बच्चों की मौत के दावे ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। आधिकारिक पुष्टि के बिना मौतों की संख्या को अंतिम नहीं माना जा सकता, लेकिन यदि भगदड़ और अव्यवस्था के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदारी तय करने का सवाल जरूर उठेगा।

फिलहाल निगाहें पुलिस और जिला प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वास्तव में क्या हुआ, कितने लोग घायल हुए और वायरल वीडियो में किए जा रहे दो बच्चों की मौत के दावे में कितनी सच्चाई है।

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