उत्तर प्रदेश की सियासत में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब कैबिनेट मंत्री संजय निषाद अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए। मंत्री के इस कदम ने सत्ता के भीतर चल रही नाराजगी को खुलकर सामने ला दिया है। संजय निषाद ने अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम की चर्चा तेज हो गई।
खास बात यह रही कि धरने को समाजवादी पार्टी की ओर से भी समर्थन मिलता नजर आया। अखिलेश यादव की पार्टी के नेताओं के समर्थन ने इस पूरे मामले को और ज्यादा राजनीतिक रंग दे दिया है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ अपनी मांगों को लेकर मंत्री का विरोध है या फिर इसके पीछे सरकार के भीतर किसी बड़े मतभेद की कहानी भी है?
संजय निषाद के धरने के बाद विपक्ष को सरकार पर निशाना साधने का नया मुद्दा मिल गया है। समाजवादी पार्टी इस घटनाक्रम को सरकार की अंदरूनी स्थिति से जोड़कर देख रही है, जबकि अब सबकी नजर सरकार और भाजपा नेतृत्व की अगली प्रतिक्रिया पर है। आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में जाता है, यह देखना राजनीतिक रूप से बेहद अहम होगा।





