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ब्लॉक बनियाखेड़ा के ग्राम बरई में सफाई व्यवस्था ध्वस्त, गली में भरा गंदा पानी

इंटरलॉकिंग सड़क तालाब में तब्दील, बच्चों में बीमारी का खतरा, ग्रामीणों में रोष

रजत मल्होत्रा

संभल/चंदौसी । स्वच्छ भारत मिशन के दावों की पोल खोलती ये तस्वीर ब्लॉक बनियाखेड़ा के ग्राम बरई की है। यहां मुख्य गली में नाली का गंदा पानी भर गया है, जिससे पूरी इंटरलॉकिंग सड़क तालाब में तब्दील हो गई है। गंदगी और जलभराव के कारण ग्रामीणों का चलना-फिरना भी मुश्किल हो गया है।

तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि गली में घुटनों तक गंदा पानी भरा हुआ है। नालियों की सफाई न होने से पानी सड़क पर बह रहा है। जगह-जगह टूटी इंटरलॉकिंग और कीचड़ से हालात और भी बदतर हो गए हैं।

बीमारी फैलने का डर

गंदे पानी के जमाव से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे इसी गंदे पानी के बीच से गुजरने को मजबूर हैं, जिससे डेंगू, मलेरिया और चर्म रोग फैलने का खतरा बना हुआ है। फोटो में भी कुछ बच्चे गंदगी के पास ही बैठे दिखाई दे रहे हैं।

ग्रामीणों में आक्रोश

ग्रामीणों का आरोप है कि सफाई को लेकर कई बार प्रधान और सचिव से शिकायत की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। सफाई कर्मचारी गांव में नियमित रूप से नहीं आते। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल नालियों की सफाई कराकर जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की है।

चारों ओर गंदगी और झाड़ियों का अंबार, लाखों की लागत से बना शौचालय बना सफेद हाथी

शासन लाखों रुपये खर्च कर गांव-गांव में स्वच्छता के प्रति जागरूकता और महिलाओं के लिए स्वच्छता परिसर बनवा रहा है, लेकिन ब्लॉक बनियाखेड़ा के ग्राम पंचायत बरई में सरकारी पैसों का दुरुपयोग हो रहा है। ग्राम पंचायत द्वारा बनाया गया महिला स्वच्छता परिसर बनने के बाद से ही ताले में बंद पड़ा है, और उसके चारों ओर गंदगी और झाड़ियों का अंबार लगा हुआ है।

तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि स्वच्छता परिसर के गेट पर बड़ा ताला लटका हुआ है। भवन के सामने और आसपास बड़ी-बड़ी झाड़ियां और घास उग आई है, और जगह-जगह कूड़ा-कचरा पड़ा हुआ है। दीवारों पर “शौच के बाद साबुन से हाथ धोएं” और “स्वच्छता की ओर एक कदम” जैसे नारे लिखे तो हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन नारों को मुंह चिढ़ा रही है।

केवल कागजों में चल रहा है केयरटेकर?

परिसर पर केयरटेकर का नाम और खुलने का समय भी लिखा है – सुबह 5 से 10 बजे और शाम 4 से 8 बजे तक, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि परिसर कभी खुलता ही नहीं है। महिलाएं आज भी खुले में शौच जाने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि लाखों की लागत से बने इस परिसर का कोई उपयोग नहीं हो रहा है। रखरखाव के अभाव में भवन जर्जर हो रहा है। दीवारों का प्लास्टर उखड़ने लगा है।

ग्राम प्रधान और सचिव पर सवाल

परिसर की दीवार पर ग्राम प्रधान और सचिव का नाम भी लिखा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब शौचालय बंद ही रखना था तो इतना पैसा क्यों बर्बाद किया गया? स्वच्छ भारत मिशन का पैसा आखिर कहां जा रहा है?

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी संभल से मांग की है कि इस मामले की जांच कराकर महिला स्वच्छता परिसर को तत्काल चालू कराया जाए और दोषियों पर कार्रवाई की जाए।

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