राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपीलों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार अपनी आर्थिक और नीतिगत कमजोरियों का बोझ आम लोगों पर डाल रही है।
राहुल गांधी ने लिखा कि प्रधानमंत्री लोगों से सोना कम खरीदने, विदेश यात्रा सीमित करने, पेट्रोल की बचत करने और खाने के तेल का कम उपयोग करने जैसी बातें कह रहे हैं। उनके अनुसार, यह सलाह नहीं बल्कि सरकार की नाकामी को दिखाने वाले संकेत हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हर बार समस्याओं की जिम्मेदारी जनता पर डाल दी जाती है, जबकि सरकार अपनी जवाबदेही से बचती है।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि पिछले कई वर्षों की नीतियों के बाद अब स्थिति ऐसी बन गई है कि लोगों को यह बताया जा रहा है कि उन्हें क्या खरीदना चाहिए और कैसे जीवन जीना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री को “समझौता करने वाला नेता” बताते हुए कहा कि देश को मजबूत नेतृत्व की जरूरत है।
दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को सिकंदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में देश की आयात निर्भरता कम करने पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि हर परिवार यदि खाने के तेल की खपत घटाए तो इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और लोगों की सेहत पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
प्रधानमंत्री ने किसानों से रासायनिक खाद का उपयोग कम करने और प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील भी की। उनका कहना था कि खाद के आयात पर भारी विदेशी मुद्रा खर्च होती है, जिसे कम करना जरूरी है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्राकृतिक खेती को बेहतर विकल्प बताया।
इसके अलावा पीएम मोदी ने पेट्रोल और डीजल की खपत घटाने के लिए सार्वजनिक परिवहन, मेट्रो, कार पूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि आज के दौर में देशभक्ति का मतलब केवल सीमा पर बलिदान देना नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में जिम्मेदार व्यवहार अपनाना भी है।






