रिपोर्टर पप्पू लाल पंचोली
फूलियाकलां (भीलवाड़ा)। उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत धनोप के नंदा का खेड़ा गांव से प्रशासनिक दावों और रविकास की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करने वाली एक मार्मिक तस्वीर सामने आई है। रविवार को तेज बारिश के बीच श्मशान घाट पर अव्यवस्थाओं के कारण परिजनों को अपने स्वजन की अंतिम विदाई में भी भारी संघर्ष करना पड़ा।
बारिश में तिरपाल के सहारे बची चिता की अग्नि
मिली जानकारी के अनुसार, गुर्जर समाज की 85 वर्षीय वृद्धा उदी देवी (पत्नी हाला गुर्जर) का देहावसान हो गया था। परिजन और ग्रामीण जब उनके अंतिम संस्कार के लिए खारी नदी किनारे स्थित श्मशान घाट पहुंचे, तो तेज बारिश शुरू हो गई। श्मशान घाट पर न तो टीनशेड की व्यवस्था थी और न ही कोई विश्राम गृह।
बारिश में चिता की लकड़ियां भीगने से बचाने के लिए ग्रामीणों को ऊपर तिरपाल तानकर खड़ा होना पड़ा। हालांकि, तिरपाल से भी पानी टपकता रहा, जिससे अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया में भारी बाधा आई। सम्मानपूर्वक दी जाने वाली अंतिम विदाई के समय लोगों को सिर छिपाने के लिए इधर-उधर भागना पड़ा।
वर्षों की मांग के बावजूद नहीं हुई सुनवाई
ग्रामीणों का कहना है कि नंदा का खेड़ा श्मशान घाट पर टीनशेड, विश्राम गृह और मूलभूत सुविधाओं के निर्माण को लेकर वे वर्षों से जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते आ रहे हैं। इसके बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द से जल्द यहां स्थायी टीनशेड व आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं ताकि किसी अन्य परिवार को ऐसी पीड़ाजनक स्थिति का सामना न करना पड़े।








