SIR को लेकर देश की सियासत में घमासान तेज हो गया है। झारखंड, दिल्ली और महाराष्ट्र में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन को लेकर विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं और इससे चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
महाराष्ट्र की ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 2.06 करोड़ मतदाताओं के नाम कम हुए हैं, जिसको लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और BJP पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इसे कथित तौर पर चुनावी लाभ हासिल करने की कोशिश बताया है।
वहीं दिल्ली में SIR के बाद करीब 47.7 लाख नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हैं। चुनाव आयोग ने दावा-आपत्ति दर्ज कराने के लिए 30 सितंबर तक का समय दिया है, ताकि योग्य मतदाता अपने नाम को लेकर आपत्ति या सुधार करा सकें।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और मृत, स्थान बदल चुके या डुप्लीकेट नामों को हटाना है। SIR को लेकर झारखंड समेत कई राज्यों में प्रक्रिया जारी है और अंतिम मतदाता सूची आने से पहले दावे-आपत्तियों का दौर चलेगा।
फिलहाल SIR का मुद्दा चुनावी राजनीति का बड़ा केंद्र बन चुका है और विपक्ष लगातार सरकार व चुनाव आयोग से पारदर्शिता की मांग कर रहा है।






