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सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत, मौलाना तौकीर रजा की रिट खारिज; बारादरी दंगा मामले में अब तेज होगा ट्रायल

बरेली। बारादरी थाना क्षेत्र में 26 सितंबर 2025 को हुए दंगा, पथराव और पुलिस पर हमले के चर्चित मामले में मौलाना तौकीर रजा को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी रिट याचिका भी खारिज कर दी। इसके साथ ही फिलहाल उनकी रिहाई की संभावना समाप्त हो गई है और अब मामले का ट्रायल निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगा।

सुनवाई के दौरान भारत सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू तथा एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड साक्षी कक्कड़ ने राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए न्यायालय के समक्ष दलील दी कि याचिकाकर्ता ने अपनी रिट में अपनी संपूर्ण आपराधिक पृष्ठभूमि का उल्लेख नहीं किया तथा महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया है। राज्य पक्ष ने यह भी अवगत कराया कि मौलाना तौकीर रजा के विरुद्ध अब तक 24 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें कई मामले समान प्रकृति के बताए गए। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद रिट याचिका खारिज कर दी।

दंगा प्रकरण में मौलाना तौकीर रजा को घटना वाले दिन 26 सितंबर 2025 को गिरफ्तार कर फतेहगढ़ केंद्रीय कारागार भेजा गया था। वह तभी से न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस की एफआईआर में उनके सहित 28 नामजद तथा लगभग 250 अज्ञात व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने पुलिस बल पर पथराव और फायरिंग की थी, जिसके बाद हालात नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग और लाठीचार्ज करना पड़ा। घटना के बाद शहर के विभिन्न थानों में कुल 12 मुकदमे दर्ज किए गए और अब तक 100 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके विरुद्ध न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस महत्वपूर्ण मुकदमे में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य के कुशल निर्देशन और सतत मॉनिटरिंग में कानूनी रणनीति तैयार की गई। सीओ प्रथम आशुतोष शिवम के पर्यवेक्षण में विवेचक संजय कुमार धीर तथा उपनिरीक्षक त्रिवेंद्र सिंह ने एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड साक्षी कक्कड़ के साथ मिलकर लगातार चार दिनों तक याचिका, केस डायरी, साक्ष्यों और न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब का गहन अध्ययन किया। पुलिस का कहना है कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में अभियोजन पक्ष ने सभी आवश्यक दस्तावेजों और तथ्यों को व्यवस्थित ढंग से तैयार कर न्यायालय के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया, जिससे राज्य पक्ष अपना पक्ष मजबूती से रख सका।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान विवेचक संजय कुमार धीर भी न्यायालय में मौजूद रहे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पूरे प्रकरण की लगातार समीक्षा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक स्तर से की जा रही थी, ताकि विवेचना, अभियोजन और न्यायालय में पैरवी के बीच बेहतर समन्वय बना रहे। अधिकारियों का मानना है कि गंभीर आपराधिक मामलों में साक्ष्यों का सुव्यवस्थित संकलन और प्रभावी कानूनी तैयारी न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।

पुलिस ने यह भी बताया कि इसी प्रकरण के सह-आरोपी साजिद सकलानी द्वारा एफआईआर निरस्त कराने के लिए दायर याचिका भी पूर्व में सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज की जा चुकी है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद शेष वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी की कार्रवाई में और तेजी लाई जाएगी।

अब मुकदमा संख्या 1146/25 में गवाहों के परीक्षण के लिए 20 जुलाई 2026 की तिथि निर्धारित की गई है और ट्रायल फास्ट ट्रैक कोर्ट में आगे बढ़ेगा। वहीं मुकदमा संख्या 489/25 में अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को होगी। पुलिस का कहना है कि ट्रायल के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय में प्रभावी पैरवी जारी रखी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को बारादरी दंगा प्रकरण की न्यायिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। फिलहाल मौलाना तौकीर रजा को किसी प्रकार की राहत नहीं मिली है और अब पूरे मामले का अंतिम निर्णय ट्रायल कोर्ट में साक्ष्यों, गवाहों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर किया जाएगा।

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