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कैराना: भूमाफियाओं को एमडीए का नहीँ खौफ, ध्वस्तीकरण के बाद पुनः निर्माण शुरू…

-शुक्रवार को एमडीए विभाग ने बुलडोज़र चलाकर चार अवैध कालोनियों को किया था ध्वस्त

कैराना। एमडीए विभाग की लचीली कार्रवाई के चलते भूमाफियाओं के हौसले बुलंद हैं। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद पुनः सक्रिय हुए कालोनाइजरों द्वारा धड़ल्ले के साथ निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है,जिन्हें एमडीए का ज़रा भी खौफ नहीँ है।

शुक्रवार को कैराना में अवैध कालोनियों की भरमार के खिलाफ मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण हरकत में आया था। जिसके चलते टीम ने कैराना पहुंचकर अवैध रूप से काटी गई चार कालोनियों में की गईं अवैध प्लाटिंग को दो बुलडोजरों से ध्वस्त करा दिया। जिसके बाद भूमाफियाओं में हड़कंप मच गया था और उनके आकाओं के फोन घनघनाने लगे थे। टीम द्वारा कई बड़ी मछिलयों पर बड़ी मेहरबानी दिखाते हुए उन्हें जीवनदान दे दिया गया था,जबकि छोटी कालोनियों पर नाम मात्र की कार्रवाई करके मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण की टीम ने अपनी पीठ थपथपाई थी। हालांकि कैराना में चारों ओर अवैध कालोनियों की  भरमार है,लेकिन मात्र चार कालोनियों पर कार्रवाई ऊंट के मुंह मे जीरा साबित हुई है। चर्चा है कि विभाग द्वारा उन्ही कालोनियों को निशाने पर लिया गया है,जो उनके अपने रिकॉर्ड में नही थी। सेटिंग- गेटिंग के इस खेल में एमडीए विभाग पर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। उधर जिन कालोनियों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई है। उन कालोनियों पर टीम के जाते ही पुनः निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है,जो सरासर विभाग की लचीली कार्रवाई की ओर इशारा करता है।कस्बे में चारों ओर पीयूष अयन आश्रम के सामने, अलीपुर मार्ग गैस एजेंसी के बराबर में,रामडा रोड, भूरा-झिंझाना मार्ग , मायापुर रोड, झाड़खेड़ी रोड, पानीपत बाईपास, नेशनल हाईवे आदि पर भोलेभाले लोग इन अवैध कालोनियों में अपने खून-पसीने की गाढ़ी कमाई लगाकर प्लाट खरीदते है। बिना अनुमति के बसाई गई इन कालोनियों पर जब प्रशासन कार्रवाई करता है, तब प्रोपर्टी डीलर अपना पल्ला झाड़ लेते है। लोगों का कहना हैं कि इन सभी कालोनियों पर भी एमडीए की कार्रवाई की दरकार है।

तहसील प्रशासन की कार्यशैली सवालों के घेरे में

जिला प्रशासन के निर्देश पर दो वर्ष पूर्व स्थानीय अधिकारियों द्वारा अवैध रूप से कालोनी बसाने वाले क्षेत्र के करीब अस्सी प्रोपर्टी डीलरों की सूची तैयार की थी। तहसील प्रशासन की ओर से उन्हें नोटिस भी थमाए गए थे, लेकिन बाद में सांठ-गांठ के चलते मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। यही वजह है कि अवैध रूप से प्लॉटिंग करने वाले इन जालसाजों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई न होने के कारण उनके हौसले बुलंद है। हालांकि एमडीए की कार्रवाई भी अभी तक ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुई है। बड़ी मछलियों को छोड़कर छोटी मछलियों को निशाना बनाया गया है, जो नगर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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अवैध कालोनियों में सरकारी हिस्सेदार

कस्बे में अवैध कालोनियों में जहां सफेदपोश लोगों की संलिप्तता जग जाहिर है, वहीं कई सरकारी सरकारी कर्मचारी भी इस अवैध काले कारोबार में बराबर शरीक हैं,जो खुलेआम सीना तानकर अधिकारियों के सामने भूमाफियाओं की पैरोकारी करते नज़र आते हैं।चर्चा तो यह भी है कि सरकारी कर्मचारी अवैध कालोनियों में पार्टनरशिप की भूमिका में है,जो कई बार भूमाफियाओं के साथ अवैध कालोनियों पर बैठे  देखे जा सकते हैं। क्या ऐसे सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

नोटिस बने आये का स्रोत

तहसील प्रशासन या मुजफ्फरनगर विकास प्रधिकरण द्वारा समय -समय पर कालोनाइजरों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं,जो मात्र मुनाफे का सौदा बनने तक सीमित रह गए हैं। तहसील प्रशासन की अगर बात करें तो हल्का लेखपाल कालोनाइजरों के साथ मिलकर अवैध कालोनियों को विकसित करने में अहम भूमिका निभाते हैं,जो कालोनाइजरों से सांठगांठ करके धारा 80 की कार्रवाई पूर्ण कराते हैं और फिर उन्हें नोटिस जारी करके खानापूर्ति करते हुए अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। ऐसा ही मामला एमडीए विभाग का भी देखने को मिलता है। पूर्व में तैनात रहे एक चर्चित जेई ने भी नोटिस का खेल खेला और फिर एक प्रत्येक डीलर से संपर्क साधकर उनसे सुविधा शुल्क वसूल किया। अब देखना यह है कि विभाग इस बार कितना दमखम अवैध कालोनियों पर कार्रवाई करने में दिखता है। या फिर पूर्व की भांति लीपा पोती करके मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

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