नेपाल इन दिनों राजनीतिक उथल-पुथल की चपेट में है। ‘We Nepali’ ग्रुप के अध्यक्ष और जेन ज़ी आंदोलन के नेता सुदन गुरुंग ने साफ तौर पर कहा है कि संसद का विघटन उनकी मूल मांग है और इसके बाद ही नई अंतरिम कैबिनेट का गठन होना चाहिए। उन्होंने पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के नाम का समर्थन भी किया है।
सुशीला कार्की की संभावना:
राष्ट्रपति आवास में देर रात हुई बैठक के बाद राजनीतिक दलों के बीच नई सरकार को लेकर सहमति बन गई है। इस सहमति के तहत सुशीला कार्की अंतरिम प्रधानमंत्री बन सकती हैं। हालांकि, संसद के विघटन को लेकर स्थिति अभी भी जटिल बनी हुई है।
भारत सीमा पर गंभीर तेल संकट:
राजनीतिक अस्थिरता का असर आम जनता पर भी पड़ रहा है। भारत सीमा पर सैकड़ों ट्रक फंसे हैं, जिससे तेल की भारी किल्लत पैदा हो गई है। कई पेट्रोल पंपों पर ईंधन खत्म हो चुका है और जहां उपलब्ध है, वहां गाड़ियों की लंबी कतारें लग गई हैं। राजधानी काठमांडू से लेकर दूरदराज के इलाकों तक लोग पेट्रोल और डीजल के लिए घंटों इंतजार कर रहे हैं।
आम लोगों की जिंदगी प्रभावित:
आंशिक कर्फ्यू ने आम लोगों की परेशानियों को और बढ़ा दिया है। प्रशासन ने सुबह 6 से 11 बजे और शाम 5 से 7 बजे कुछ ढील दी है, लेकिन बाकी समय सेना और पुलिस सड़कों पर तैनात हैं। पिछले कुछ दिनों में हुई हिंसा में सैकड़ों लोग घायल हुए हैं।
राजनीतिक असमंजस और भविष्य की चुनौतियां:
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद नई सरकार को लेकर राजनीतिक असमंजस बना हुआ है। अब देश की निगाहें इस बात पर लगी हैं कि अंतरिम सरकार के तहत प्रशासनिक और आर्थिक व्यवस्था कैसे चलेगी और जनता की परेशानियों का समाधान कब होगा।






