सोमवार को आए फैसले के बाद सरकार ने जो बयान जारी किया, उसमें भी इस मुद्दे पर चुप्पी ही साधी गई। दिलचस्प यह है कि न्यायाधिकरण का फैसला बिल्कुल एकतरफा रहा—हसीना को तो अपना पक्ष रखने तक का मौका नहीं मिला। पूरे घटनाक्रम को देखें तो यह मामला अपराध से ज्यादा राजनीति से प्रभावित लगता है, और यही बात भारत के प्रत्यर्पण न करने के रुख को और मजबूत करती है।






