आज राजधानी दिल्ली की सड़कों पर सियासी हलचल तेज़ है। 2024 के लोकसभा चुनाव में कथित “वोट चोरी” और मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर INDIA गठबंधन के नेता एकजुट होकर प्रदर्शन करने जा रहे हैं। संसद से चुनाव आयोग तक यह मार्च लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर हो रहा है। कुल 25 विपक्षी दलों के 300 से ज़्यादा सांसद इस मार्च में शामिल हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी खुद इस प्रदर्शन में भाग लेने पहुंचे हैं, और कुछ ही देर में यह रैली शुरू होने वाली है।
बता दे की संसद का मानसून सत्र चल रहा है, लेकिन आज की सुबह लोकसभा और राज्यसभा दोनों की कार्यवाही दोपहर तक के लिए स्थगित कर दी गई है। इसकी एक बड़ी वजह यही विरोध प्रदर्शन माना जा रहा है।

साथ ही कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा, “वे सुनते तो हैं, लेकिन कभी साफ जवाब नहीं देते। अब समय आ गया है कि आयोग जनता के सामने सच्चाई रखे। हमें शांति से मार्च करने देना चाहिए—यह हमारा लोकतांत्रिक अधिकार है। और सुरक्षा देना तो उनकी जिम्मेदारी है।” दिल्ली पुलिस ने साफ किया है कि इस प्रदर्शन के लिए उनसे कोई औपचारिक अनुमति नहीं ली गई है। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि सांसदों को चुनाव आयोग तक जाने से रोका जा सकता है।
साथ ही दिल्ली पुलिस ने साफ किया है कि इस प्रदर्शन के लिए उनसे कोई औपचारिक अनुमति नहीं ली गई है। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि सांसदों को चुनाव आयोग तक जाने से रोका जा सकता है।

इस विरोध मार्च में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, वामपंथी पार्टियां, आरजेडी, एनसीपी (शरद पवार गुट), शिवसेना (उद्धव गुट) और नेशनल कॉन्फ्रेंस जैसे कई बड़े विपक्षी दल एकजुट हैं। मार्च सुबह 11:30 बजे संसद भवन के मकर द्वार से शुरू होने की योजना है।
क्या मांग है?
लोकसभा चुनाव में गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच
बिहार में चल रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) की समीक्षा
इस विरोध को विपक्ष “लोकतंत्र की आवाज़” बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष की ओर से अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। देखना ये होगा कि क्या ये प्रदर्शन केवल प्रतीकात्मक रहेगा, या वाकई कोई ठोस असर छोड़ पाएगा।
रिपोर्ट:- कनक चौहान






