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हरिसिंह को सम्राट विक्रम विश्वविद्यालय से आरक्षण की राजनीति पर शोध उपाधि मिली

झालावाड़ से ब्यूरो चीफ आसिफ शेरवानी की रिपोर्ट

झालावाड़ सम्राट विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन से बड़ोदिया निवासी हरिसिंह गुर्जर को शोध उपाधि प्रदान की गई है। उन्होंने ‘भारत में आरक्षण की राजनीति: राजस्थान में गुर्जर आरक्षण आन्दोलन के विशेष संदर्भ में एक अध्ययन’ विषय पर अपना शोध कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया है। ने यह महत्त्वपूर्ण शोध मध्यप्रदेश सामाजिक शोध संस्थान के निदेशक यतीन्द्र सिंह सिसोदिया के कुशल निर्देशन में और प्रोफेसर निष्ठा वशिष्ठ के सहनिर्देशन में पूरा किया। उनके शोध का केंद्र बिंदु राजस्थान में वर्ष 2007 से 2012 के दौरान हुए गुर्जर आरक्षण आंदोलन रहा है। इस गहन अध्ययन के माध्यम से हरिसिंह ने आरक्षण व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला है और कई महत्त्वपूर्ण तथा तर्कपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए हैं। अपने शोध के दौरान, गुर्जर ने पिछड़े और वंचित वर्गों को समाज की मुख्य धारा में शामिल करने के लिए कई अहम और व्यावहारिक तरीके भी सुझाए हैं। उनका यह कार्य सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है। शोध में, उन्होंने आरक्षण की राजनीति के ऐतिहासिक, सामाजिक और राजनीतिक आयामों का विश्लेषण किया, जिससे इस जटिल मुद्दे की गहरी समझ विकसित करने में मदद मिलती है। हरिसिंह ने अपनी इस अकादमिक उपलब्धि का संपूर्ण श्रेय अपने माता-पिता सुशिला बाई और कन्हैयालाल को दिया है। इसके साथ ही, उन्होंने अपने बड़े भाई स्व. नन्दलाल गुर्जर और सत्यनारायण गुर्जर के निरंतर सहयोग और प्रेरणा को भी याद किया। उनके इस कार्य में पत्नी कल्पना गुर्जर व बेटे दिव्यांश का भी सहयोग रहा। यह शोध उपाधि हरिसिंह गुर्जर के अथक परिश्रम और समर्पण का परिणाम है, जो सामाजिक मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ और विश्लेषण क्षमता को प्रदर्शित करता है। यह शोध समाज के पिछड़े वर्गों के उत्थान और आरक्षण नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक उपयोगी पुस्तक के रूप में साबित होगी।

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