वंचितसमाज इंसाफ पार्टी के कुल हिंद सदर डॉ. शेख ने कहा कि आजकल मौलाना मदनी के बयान को लेकर काफी चर्चा हो रही है। विभिन्न टीवी चैनलों पर लगातार डिबेटें चल रही हैं। जिस तरह गोदी मीडिया ने ‘जिहाद’ शब्द को बदनाम किया है, उसे इतना खतरनाक बना दिया है कि हर रोज किसी न किसी तरह के ‘जिहाद’ पर बहस होती रहती है।

डॉ. शेख ने कहा कि मौलाना मदनी साहब एक सुलझे हुए वक्ता हैं। उन्हें जिहाद का असली मकसद स्पष्ट रूप से बताना चाहिए था ताकि लोगों को इस शब्द का सही अर्थ समझ में आता और नफरत फैलाने वाली मीडिया इस पर भ्रामक डिबेट करने से बचती।उन्होंने कहा कि जिहाद का वास्तविक अर्थ है—संघर्ष, प्रयास और मेहनत।डॉ. शेख ने कहा कि मौलाना को मंच से अपील करनी चाहिए थी कि अब वक्त आ गया है कि देश का हर मुसलमान जिहाद यानी संघर्ष करे—नफरत के खिलाफआतंकवाद के खिलाफअशिक्षा के खिलाफसमाज की बुराइयों के खिलाफअसमानता के खिलाफअगर यह संदेश दिया जाता, तो देश में एक सकारात्मक और बेहतर संदेश जाता।डॉ. शेख ने आगे कहा कि वे सभी मुस्लिम स्कॉलरों से अपील करते हैं कि टीवी डिबेटों से दूर रहें।

क्योंकि वहां हिंदू–मुस्लिम, मंदिर–मस्जिद और जिहाद के अलावा कोई मुद्दा नहीं होता। ये अडानी-अंबानी के चैनल हैं, जिन्हें सिर्फ टीआरपी चाहिए। इन डिबेटों ने हिंदू–मुस्लिम भाईचारे और आपसी विश्वास को बहुत नुकसान पहुंचाया है।उन्होंने देश के हिंदू और मुसलमानों से सवाल पूछा कि क्या आपने कभी इन चैनलों पर—भुखमरी के खिलाफबेरोजगारी के खिलाफकिसानों की बदहाली के खिलाफदेश में बढ़ते बलात्कारों के खिलाफबड़े भ्रष्टाचारों के खिलाफदेश का पैसा लूटकर भागे लोगों के खिलाफडॉ. शेख ने कहा कि ऐसे चैनलों का बहिष्कार होना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट को इन नफरत से भरी डिबेटों पर रोक लगानी चाहिए।अंत में उन्होंने कहा कि हम सबको भारत की तरक्की और देशभक्ति के लिए काम करना चाहिए।






