उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से एक ऐसी ख़बर आई है जिसने हर किसी को अंदर तक हिला दिया है। यहां एक मां ने पहले अपनी तीन मासूम बेटियों का गला दबाकर जीवन छीन लिया और फिर खुद भी उसी चुनरी से फंदा लगाकर दुनिया से विदा हो गई। सवाल यह है कि आख़िर एक मां, जो बच्चों के लिए जीती है, उसे इतना बड़ा कदम उठाने की मजबूरी क्यों महसूस हुई?
मां और बच्चियों की दर्दनाक कहानी
घटना बागपत के टीकरी कस्बे की है। 29 साल की तेजकुमारी ने अपनी तीन बेटियों—गुंजन (7), किट्टो (2) और 5 महीने की मासूम मीरा—को चुनरी से गला घोंटकर मौत की नींद सुला दिया। इसके बाद उसी चुनरी से फंदा लगाकर उसने खुद भी जान दे दी।
यह सब कुछ उस वक्त हुआ, जब उसका पति विकास घर के बाहर सो रहा था। घर के भीतर कमरे में हो रहा यह मातम उसे जरा भी सुनाई नहीं दिया।
पति-पत्नी के बीच खटास
तेजकुमारी चाहती थी कि पति के साथ वह दिल्ली में रहे, ताकि बच्चियों का भविष्य बेहतर हो। लेकिन पति, जो टूरिस्ट बस चलाता था, बार-बार आर्थिक स्थिति का हवाला देकर उसे रोक देता। यही छोटी-छोटी तकरार शायद तेजकुमारी के मन में गहरी चोट कर गई।
बंद कमरे का राज़
मंगलवार रात जब विकास ने दरवाजा खटखटाया तो अंदर से कोई आवाज़ नहीं आई। बार-बार पुकारने के बाद भी सन्नाटा ही मिला। मजबूर होकर उसने पुलिस को बुलाया।
दरवाजा अंदर से बंद था, इसलिए रोशनदान से टॉर्च डालकर देखा गया। दृश्य इतना भयानक था कि पड़ोसी दंग रह गए—बेटियों के नन्हें शव फर्श पर पड़े थे और मां फांसी के फंदे पर लटकी थी।
पुलिस की जांच और अनुत्तरित सवाल
पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों का मानना है कि पति-पत्नी के बीच विवाद इस कदम की वजह बन सकता है।
लेकिन असली सवाल अभी भी वहीं खड़ा है—आख़िर तेजकुमारी के दिल में ऐसा क्या दर्द था, जो उसने मासूम बेटियों को भी इस सफ़र में साथ ले लिया?






