ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार उनके एक पुराने बयान को लेकर विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। कुछ संगठनों और लोगों ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग उठाई है। उनका आरोप है कि रामलला की मूर्ति को लेकर की गई टिप्पणी से करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं प्रभावित हुई हैं।
बताया जा रहा है कि शंकराचार्य ने अपने एक वक्तव्य में रामलला की प्रतिमा का उल्लेख “काला पत्थर” के रूप में किया था। यह बयान दोबारा सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद विरोध शुरू हो गया। विरोध करने वालों का कहना है कि धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों पर सार्वजनिक टिप्पणी करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
शिकायत करने वाले पक्ष ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी बयान से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने का आरोप है, तो उसकी कानूनी समीक्षा होनी चाहिए।
दूसरी ओर, इस पूरे विवाद पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद या उनके प्रतिनिधियों की ओर से इस नई मांग को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे मामलों में संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है या नहीं। प्रशासन की ओर से जो भी आधिकारिक जानकारी सामने आएगी, उसके बाद ही मामले की कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर धार्मिक आस्था, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक बयानों की जिम्मेदारी को लेकर बहस तेज कर दी है।






