हत्या, दोहरी हत्या और गोलीबारी की 4 बड़ी वारदातें; कई मामलों में अब तक गिरफ्तारी नहीं, थाना स्तर से लेकर एसपी-डीएसपी की निगरानी तक पर उठे सवाल
एक घटना का खुलासा नहीं हुआ, दूसरी वारदात हो गई; क्या अपराधियों को पुलिस का डर नहीं? अब थाना अध्यक्ष की कार्यशैली से लेकर वरीय अधिकारियों की सुपरविजन तक की समीक्षा जरूरी
समस्तीपुर/विभूतिपुर। विभूतिपुर थाना क्षेत्र में पिछले करीब 40 दिनों के भीतर अपराध की चार बड़ी घटनाओं ने कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लूट के प्रयास में फायरिंग से शुरू हुआ घटनाक्रम हत्या, बुजुर्ग दंपती की दोहरी हत्या और फिर युवक पर ताबड़तोड़ फायरिंग तक पहुंच गया। लगातार सामने आ रही वारदातों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक घटना की जांच और गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी होने से पहले दूसरी वारदात क्यों हो जा रही है?
16 जुलाई को सिंघियाघाट पंचवटी चौक स्थित दिनेश ज्वेलर्स एंड सन्स में हथियारबंद बदमाशों ने लूट का प्रयास किया। विरोध करने पर फायरिंग में दुकान संचालक दिनेश साह घायल हुए। बदमाश भीड़ जुटने पर फरार हो गए। घटना में सीसीटीवी फुटेज जैसे तकनीकी सुराग सामने आने के बावजूद यदि आरोपियों की गिरफ्तारी लंबित है, तो जांच की प्रगति पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इसके करीब एक महीने बाद 16 अगस्त की रात गंगौली कामास्थान वार्ड-4 में 50 वर्षीय भिखारी सदा की हत्या कर दी गई। घटनास्थल के पास से बाइक बरामद होने की बात सामने आई, लेकिन मामले में गिरफ्तारी की स्थिति अब भी सवालों के घेरे में है।
इसके बाद 24 अगस्त की रात भरपुरा वार्ड-11 के भोलईया टोला में 70 वर्षीय बंगाली दास और उनकी 65 वर्षीय पत्नी धनमा देवी की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई। दोहरे हत्याकांड की सूचना पर डीआईजी, एसपी, एसडीपीओ समेत डॉग स्क्वॉड और एफएसएल टीम ने घटनास्थल का जायजा लिया। इतनी बड़ी पुलिस कार्रवाई के बावजूद यदि अब तक अपराधियों तक जांच नहीं पहुंच सकी है, तो मामले की मॉनिटरिंग पर सवाल उठना लाजिमी है।
डबल मर्डर के महज दो दिन बाद 26 अगस्त की देर शाम महथी बांध पर दो बाइक से पहुंचे पांच बदमाशों ने आदित्य वत्स उर्फ नवनीत सिंह पर फायरिंग कर दी। युवक को चार गोलियां लगीं। एक के बाद एक सामने आई इन घटनाओं ने क्षेत्र में पुलिस की मौजूदगी और अपराधियों के मनोबल को लेकर लोगों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
अब सवाल सिर्फ अपराधियों से नहीं, पुलिसिंग से भी
लगातार गंभीर घटनाओं के बाद यह जानना जरूरी हो गया है कि थाना स्तर से लेकर वरीय अधिकारियों के स्तर तक इन मामलों की समीक्षा किस तरह की जा रही है।
क्या प्रत्येक गंभीर कांड में जांच की स्पष्ट कार्ययोजना बनाई गई?
क्या सीसीटीवी, मोबाइल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का प्रभावी इस्तेमाल हुआ?
क्या पुराने अपराधियों और संदिग्ध गिरोहों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई गई?
क्या संवेदनशील इलाकों में रात्रि गश्ती और वाहन जांच बढ़ाई गई?
क्या लंबित कांडों की समीक्षा कर गिरफ्तारी अभियान तेज किया गया?
थाना अध्यक्ष की कार्यशैली भी समीक्षा के दायरे में
लगातार हत्या और फायरिंग जैसी घटनाओं के बाद विभूतिपुर थाना स्तर की पुलिसिंग की निष्पक्ष समीक्षा की जरूरत महसूस हो रही है। समीक्षा केवल एफआईआर दर्ज होने और केस डायरी लिखे जाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
यह भी देखा जाना चाहिए कि घटना के बाद पुलिस कितनी जल्दी मौके पर पहुंची, संदिग्धों से पूछताछ और तकनीकी जांच कितनी प्रभावी रही, पुराने अपराधियों की निगरानी का रिकॉर्ड क्या है, बीट पुलिसिंग और सूचना तंत्र कितना सक्रिय है तथा लंबित मामलों में गिरफ्तारी की वास्तविक स्थिति क्या है।
यदि जांच में थाना स्तर पर लापरवाही या संसाधनों के इस्तेमाल में कमी सामने आती है तो जवाबदेही तय होना जरूरी है।
एसडीपीओ स्तर की सुपरविजन भी अहम
गंभीर आपराधिक मामलों की जांच केवल थाना अध्यक्ष और अनुसंधानकर्ता तक सीमित नहीं होती। ऐसे मामलों में वरीय अधिकारियों की सुपरविजन भी महत्वपूर्ण होती है। लगातार वारदातों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि एसडीपीओ स्तर पर इन कांडों की समीक्षा कितनी नियमित और प्रभावी रही।
क्या अलग-अलग घटनाओं के बीच संभावित कनेक्शन की जांच हुई?
क्या अपराध के पैटर्न का विश्लेषण किया गया?
क्या संवेदनशील इलाकों को चिन्हित कर अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया?
क्या लंबित मामलों के आधार पर विशेष गिरफ्तारी अभियान चलाया गया?
इन सवालों के जवाब पुलिस प्रशासन की ओर से सामने आना जरूरी है।
अब जरूरत ‘रूटीन समीक्षा’ नहीं, क्राइम ऑडिट की
विभूतिपुर में लगातार हुई इन घटनाओं के बाद अब सिर्फ यह बताना पर्याप्त नहीं होगा कि पुलिस जांच कर रही है। जरूरत इस बात की है कि पिछले 40 दिनों की सभी गंभीर घटनाओं का थाना से लेकर एसडीपीओ और एसपी स्तर तक क्राइम ऑडिट किया जाए।
किस मामले में क्या कार्रवाई हुई?
कहां जांच आगे बढ़ी और कहां अटकी?
किस अधिकारी को क्या जिम्मेदारी दी गई?
किस बिंदु पर कार्रवाई लंबित है?
और सबसे अहम—अपराध की अगली घटना रोकने के लिए पुलिस ने क्या बदला?
विभूतिपुर के लोगों को अब केवल अपराधियों की गिरफ्तारी का इंतजार नहीं है। वे यह भी जानना चाहते हैं कि लगातार वारदातों के बीच पुलिसिंग की रणनीति क्या है और यदि कहीं चूक हुई है तो उसकी जिम्मेदारी कौन तय करेगा।
सवाल अब सीधा है—अगली वारदात का इंतजार होगा या चार गंभीर घटनाओं के बाद पुलिसिंग की भी जवाबदेही तय होगी?
पुलिस का पक्ष नहीं मिल सका :
मामले में पुलिस का पक्ष जानने के लिए विभूतिपुर थानाध्यक्ष, रोसड़ा एसडीपीओ एवं समस्तीपुर एसपी से संपर्क करने का प्रयास किया गया। फोन पर संपर्क नहीं हो सका। समाचार लिखे जाने तक पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई। पुलिस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया मिलने के बाद उसे आगे की खबर में प्रमुखता से रखी जाएगी।











