चित्रकूट। विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक कल्याण और व्यक्तित्व विकास को मजबूती देने के उद्देश्य से सेंट थॉमस स्कूल, शिवरामपुर, चित्रकूट में रविवार को एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण सीबीएसई के निर्देशानुसार किया गया, जिसमें शिक्षकों को छात्रों के मनोवैज्ञानिक व्यवहार को बेहतर ढंग से समझने और उनकी समस्याओं की प्रारंभिक पहचान करने के तरीके बताए गए।
कार्यक्रम में सीबीएसई क्षेत्रीय कार्यालय, प्रयागराज से आए विशेषज्ञ नितेश कुमार सिंह और मनु भट्ट ने संसाधन व्यक्ति के रूप में अपनी सेवाएँ दीं। दोनों विशेषज्ञों ने आधुनिक शैक्षणिक परिवेश में बढ़ती मानसिक चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि बदलती सामाजिक परिस्थितियों, प्रतिस्पर्धा और डिजिटल माध्यमों के प्रभाव के कारण छात्रों में तनाव, अकेलापन और अवसाद की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है।
विशेषज्ञों ने शिक्षकों को व्यक्तित्व विकारों (Personality Disorders) के विभिन्न रूपों, उनके लक्षणों और व्यवहार में आने वाले बदलावों की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने यह भी समझाया कि किस प्रकार शिक्षक अपने दैनिक व्यवहार और संवेदनशील दृष्टिकोण से बच्चों को मानसिक रूप से सुरक्षित वातावरण प्रदान कर सकते हैं।
वक्ताओं ने कहा कि—छात्रों में अवसाद, कम आत्मविश्वास, चिड़चिड़ापन, और सामाजिक दूरी जैसे संकेतों की समय रहते पहचान जरूरी है।मानसिक स्वास्थ्य देखभाल का सबसे बड़ा लक्ष्य यह है कि छात्रों की शारीरिक, भावनात्मक और सामाजिक जरूरतों के बीच सामंजस्य स्थापित किया जाए।शिक्षकों को चाहिए कि वे बच्चों को खुलकर अभिव्यक्ति का अवसर दें और उनकी सहनशक्ति (Resilience) बढ़ाने में सहयोग करें।कार्यक्रम का संचालन सेंट थॉमस स्कूल के प्रिंसिपल फादर बास्टिन अराकल ने किया। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और ऐसे प्रशिक्षण शिक्षकों को अधिक संवेदनशील व सक्षम बनाते हैं। स्कूल प्रबंधन ने विशेषज्ञों का आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी ऐसे उपयोगी प्रशिक्षण जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।प्रशिक्षण सत्र के अंत में शिक्षकों ने इसे अत्यंत लाभकारी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें छात्रों की मनोवैज्ञानिक जरूरतों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।
रिपोर्ट संजय मिश्रा






