मेरठ के सरधना थाना क्षेत्र के नवाबगढ़ी गांव में दो मासूम बच्चों – 14 साल के उवैश और छोटे रिहान – की दर्दनाक और नृशंस हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। ये सिर्फ हत्या नहीं थी, बल्कि अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र की आड़ में की गई वहशी बलि थी, जिसने दो परिवारों के चिराग बुझा दिए।मुख्य आरोपी असद नाम का एक तथाकथित तांत्रिक है, जिसने खुद यह कबूल किया कि उसने ‘शक्तियां’ पाने के लिए इन मासूमों की बलि दी। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि दोनों परिवारों ने पहले ही पुलिस को असद पर शक जताया था, बार-बार गुहार लगाई थी… लेकिन पुलिस ने सब कुछ नजरअंदाज कर दिया।उवैश की कहानी दिल को चीर देने वाली है। 11 जुलाई की शाम वो रोज़ की तरह नमाज़ पढ़ने घर से निकला, लेकिन फिर कभी वापस नहीं लौटा। जब उसके परिवार ने उसे खोजा और फिरौती का मैसेज आया, तो उन्होंने डर के मारे तुरन्त 5,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए, पर इसका कोई असर नहीं हुआ। दो दिन बाद पुलिस ने जब एक उजड़े हुए मकान की तलाशी ली, तो वहां उवैश की लाश मिली — गला घोंटकर मारा गया था।
रिहान की गुमशुदगी की कहानी कुछ महीने पुरानी है — अप्रैल की। उस वक्त भी उसकी मां फरहाना ने पुलिस से गुहार लगाई थी, आरोपी असद का नाम तक बताया था। लेकिन पुलिस ने इसे महज़ किसी रंजिश या प्रेम-प्रसंग का मामला बताकर फाइल बंद कर दी।अब, जब असद को उवैश के मामले में पकड़ा गया, तो उसने रिहान की हत्या भी स्वीकार कर ली। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने खेत से रिहान के कपड़े और कंकाल बरामद किए हैं।ये घटना सिर्फ दो मासूमों की हत्या नहीं, बल्कि हमारे सिस्टम की संवेदनहीनता, पुलिस की लापरवाही और समाज में फैलते अंधे अंधविश्वास की चुभती हुई मिसाल है। सवाल ये है कि अगर पुलिस वक्त पर सुनती, तो क्या दो जिंदगियाँ बच सकती थीं?






