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धर्म परिवर्तन पर बैन? सुप्रीम कोर्ट ने उठाया सबसे बड़ा सवाल – धोखाधड़ी कौन तय करेगा

नई दिल्ली। धर्म परिवर्तन को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई थी कि जबरन और धोखाधड़ी से किए जा रहे धर्म परिवर्तन पर सख्त रोक लगाई जाए।

सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ किया कि मामला बेहद जटिल है और इसे केवल “धोखाधड़ी” कहकर परिभाषित करना आसान नहीं है। जस्टिस एसडी कुलकर्णी और जस्टिस संजय करोल की बेंच ने सवाल उठाया – “आख़िर यह कौन तय करेगा कि धर्म परिवर्तन धोखे से हुआ है या व्यक्ति की स्वतंत्र इच्छा से?”

याचिकाकर्ता का तर्क था कि कई राज्यों में जबरन धर्म परिवर्तन को लेकर कानून बने हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर ठोस नियमों की ज़रूरत है। अदालत ने केंद्र सरकार से इस पर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है।

बेंच ने यह भी संकेत दिया कि व्यक्ति की आस्था और धर्म चुनने की स्वतंत्रता संविधान के तहत मौलिक अधिकार है। ऐसे में इस स्वतंत्रता और “धोखाधड़ी” के बीच की रेखा तय करना आसान नहीं होगा।

अदालत ने अगली सुनवाई में केंद्र से ठोस जवाब दाखिल करने को कहा है।

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