रामपुर: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान को फौज पर विवादित टिप्पणी से जुड़े 8 साल पुराने मामले में रामपुर की स्थानीय अदालत ने बरी कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सका, इसलिए आजम खान को benefit of doubt मिल गया।
क्या था मामला?
साल 2016 के विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान आजम खान ने एक रैली में सेना और उसके ऑपरेशन को लेकर एक टिप्पणी की थी।बयान को लेकर विवाद हुआ और उन पर फौज की छवि खराब करने और भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगा।स्थानीय पुलिस ने IPC की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।8 साल बाद आया फैसलाइस केस की सुनवाई 8 साल तक चली।
अभियोजन पक्ष गवाहों और वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिए आरोप साबित नहीं कर पाया।कोर्ट ने कहा कि बयान की सत्यता और संदर्भ साबित करने के लिए पूरी तरह पुख्ता साक्ष्य मौजूद नहीं हैं।इसी आधार पर कोर्ट ने आजम खान को बरी कर दिया।
आजम खान ने क्या कहा?फैसले के बाद आजम खान ने कहा कि उन्हें हमेशा कानून पर भरोसा था और यह फैसला साबित करता है कि उनके खिलाफ राजनीतिक रूप से प्रेरित केस दर्ज किए गए थे।राजनीतिक प्रतिक्रियासपा नेताओं ने इसे न्याय की जीत बताया।भाजपा नेताओं ने कहा कि अदालत का फैसला अपने स्थान पर है, लेकिन आजम खान के खिलाफ कई अन्य गंभीर मामले भी विचाराधीन हैं।






